
जमशेदपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) ने सामाजिक सरोकार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। एनएमएल परिसर में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों, तकनीकी शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, अस्थायी कर्मचारियों और उनके परिजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ‘रक्तदान-जीवनदान’ के महत्व को चरितार्थ करते हुए इस शिविर में कुल 85 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।

उप-निदेशक डॉ एस सिवाप्रसाद ने किया विधिवत उद्घाटन
इस परोपकारी कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन सीएसआईआर-एनएमएल के उप-निदेशक डॉ एस सिवाप्रसाद ने किया। उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि विज्ञान के जरिए देश की प्रगति में योगदान देने के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना अत्यंत सुखद है। इस अवसर पर प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक जय शंकर शरण, मुख्य वैज्ञानिक डॉ संजय कुमार, डॉ देवव्रत मिश्रा, डॉ कमला कांत साहू, डॉ शर्मिष्ठा सागर, डॉ एम मालथी और चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रियंका सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थीं।
निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी के मार्गदर्शन में मिली सफलता
पूरे आयोजन की रूपरेखा सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी के कुशल निर्देशन और प्रशासन नियंत्रक जय शंकर शरण के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी। शिविर को सुचारू रूप से चलाने में ‘एनएमएल स्टाफ क्लब’ की भूमिका बेहद सराहनीय रही। क्लब के डॉ संजय अग्रवाल, रोहित मुदी, परमार्थ सुमन, विजय आनंद मुखी, झुमकी हैत और संतोष राय ने पूरे दिन व्यवस्था संभाली। इसके अलावा प्रयोगशाला के सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार मुदी, डॉ अंजनी कुमार साहू, संजय कुमार, अजय पुराण और तुलसी मुखी ने भी इस आयोजन में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया।
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जमशेदपुर ब्लड बैंक और वीबीडीए का रहा अहम सहयोग
शिविर के सफल चिकित्सकीय संचालन में जमशेदपुर ब्लड बैंक (Jamshedpur Blood Bank) की कुशल मेडिकल टीम तथा वॉलंटरी ब्लड डोनर्स एसोसिएशन (VBDA) के पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। रक्तदाताओं के स्वास्थ्य की प्रारंभिक जांच के बाद ही पूरी तरह सुरक्षित माहौल में रक्त लिया गया। आयोजकों ने बताया कि प्रयोगशाला भविष्य में भी इस तरह के जन-कल्याणकारी अभियानों को निरंतर जारी रखेगी, ताकि कोल्हान के अस्पतालों में कभी भी किसी जरूरतमंद की जान खून की कमी से न जाए।



