
चाईबासा (Chaibasa): कोल्हान विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ और खेल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के ‘वीर पोतो हो सभागार’ में आयोजित इस विशेष सत्र में शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने एक साथ योगाभ्यास कर शारीरिक और मानसिक संतुलन का सशक्त संदेश दिया।

‘भारतीय संस्कृति की सबसे अनमोल धरोहर है योग’
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ खेल निदेशक डॉ. मनमथ नारायण सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर बल दिया। वहीं, एनएसएस समन्वयक सह निदेशक डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि योग केवल कोई कसरत या शारीरिक व्यायाम नहीं है; यह शरीर, मन और आत्मा के बीच एक आदर्श समन्वय स्थापित करने का सबसे बड़ा माध्यम है।
तनावपूर्ण जीवनशैली का ‘ब्रह्मास्त्र’ है प्राणायाम
सत्र के मुख्य वक्ता एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. परशुराम सियाल ने योग के सामाजिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर की अत्यधिक तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी जीवनशैली में, खुद को मानसिक रूप से स्थिर रखने के लिए योगाभ्यास ही एकमात्र व्यावहारिक आधार है। कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक आशित बरन दत्ता और उनकी पूरी टीम ने उपस्थित लोगों को विभिन्न प्रकार के कठिन व सरल आसनों, प्राणायाम और ध्यान (Meditation) की व्यावहारिक विधियों का कड़ा अभ्यास कराया।
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इन गणमान्य लोगों की रही गरिमामय उपस्थिति
इस आयोजन में विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. मुरली मिश्रा, प्लेसमेंट सेल की निदेशक डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. तनुजा मोहंती, डॉ. जया जैकलिन तिर्की, महेंद्र बिरुली, राखी बिरुली, सुशमिता पुर्ती बिरुली, समीर, छात्र संघ प्रतिनिधि पिपुन बारिक, सनातन पिंगुआ और जुरा बारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को धरातल पर सफल बनाने में एनएसएस स्वयंसेवक निकॉन, गुलशन, राखमी और सत्यवान की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
छात्रों को मिली मानसिक शांति, लिया आजीवन संकल्प
सत्र के अंत में योगाभ्यास करने वाले छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योग के ध्यान सत्र से उन्हें अपार मानसिक शांति और असीम ऊर्जा की प्राप्ति हुई है। सभी ने ताउम्र नियमित रूप से योग करने का दृढ़ संकल्प लिया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जया जैकलिन तिर्की ने किया, जिसके बाद सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


