
रांची (Ranchi): शहर के खेलगांव स्थित स्टेट म्यूजियम सभागार में रविवार को ‘सांस्कृतिक भारत’ की अद्भुत झलक देखने को मिली। समस्कृतिकी और नृत्यशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल’ (IIDF) में पूरे देश से आए 160 नर्तकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। इस भव्य समारोह में एक मंच पर नृत्य की विविध शैलियों का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को करतल ध्वनि करने पर मजबूर कर दिया।
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मोहिनीअट्टम, बिहू और भरतनाट्यम की अद्भुत छटा
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ कलामंडलम सृजा कृष्णन के ‘मोहिनीअट्टम’ नृत्य से हुआ। इसमें भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के स्त्री सौंदर्य और कोमलता को 24 हस्त मुद्राओं के जरिए बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद गीतांजलि डांस इंस्टीट्यूशन की डॉ. चंद्र शालिनी कुजूर, रेशमा तिर्की व अन्य कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-पेपा की धुनों पर ऊर्जावान ‘बिहू’ नृत्य किया। वहीं, सुष्मिता सेन बिस्वास, मैमोनी मंडल और स्तुति केडिया ने 52 हस्त मुद्राओं और आदि ताल का उपयोग करते हुए ‘भरतनाट्यम’ की मनमोहक प्रस्तुति दी।
शिव वंदना से सजा कथक और गीत गोविंदम पर ओडिशी
नृत्यशाला के विद्यार्थियों ने कथक की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसमें भगवान राम के कृपालु रूप के साथ-साथ भगवान शिव की महिमा का बखान किया गया। अनुरिमा झा और सुमोना चटर्जी के सोलो कथक ने भी सबका ध्यान खींचा। ओडिशी नृत्य में अरिंजिता चटर्जी, राजनंदनी सहित देवसूत्र ग्रुप ने जयदेव की ‘गीत गोविंदम’ की कविताओं पर त्रिभंगी और चौक मुद्राओं के साथ मनमोहक प्रस्तुति दी। इस बीच जमशेदपुर की युवा नर्तक कश्यपि ने स्केटिंग के माध्यम से अद्भुत नृत्य कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
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कलाकारों को मंच देना है मुख्य उद्देश्य
उद्घाटन सत्र में कमर्शियल टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अधिवक्ता प्रीतम कुमार लाला ने कहा कि ऐसे आयोजनों से देश के कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का बड़ा मंच मिलता है। वहीं, नृत्यशाला की संस्थापक व आईआईडीएफ रांची की संयोजक मोनिका डे ने संस्कृति निदेशालय का आभार जताते हुए कहा कि पहली बार रांची में इस फेस्टिवल का होना गर्व का विषय है। इससे युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि और संस्कृति निदेशालय के निदेशक आसिफ एकराम ने कहा कि इससे झारखंड के कलाकारों में नई चेतना का विकास होगा। इस अवसर पर जर्मनी से आईं डॉ. ईस्थर, श्यामा प्रसाद नियोगी, संजय रंजन सिंह, चंदन बिस्वा सहित कलाजगत के कई दिग्गज मौजूद रहे।



