
जमशेदपुर: भारतीय रेलवे (Indian Railways) की समयपालन व्यवस्था और यात्री सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक (GM) ने जमशेदपुर का दौरा कर यात्री ट्रेनों के सुचारू संचालन का आश्वासन दिया था। लेकिन, इस पर कड़ा प्रहार करते हुए पूर्व लोकसभा प्रत्याशी और जन विकास मंच के प्रमुख सौरभ विष्णु ने रेलवे जीएम के दावों को महज “झूठी दिलासा” करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक रेलवे के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और पटरियां (Railway Tracks) नहीं होंगी, तब तक यात्री ट्रेनों का समय पर परिचालन पूरी तरह से असंभव है।

मालगाड़ियों से राजस्व बढ़ाने के दबाव में है चक्रधरपुर रेल मंडल
सौरभ विष्णु ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि रेलवे की पिछली वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार को रेलवे के माल ढुलाई (Freight Trains) के राजस्व में 8 से 10 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई के लिए रेलवे बोर्ड ने सभी रेल मंडलों को किसी भी कीमत पर राजस्व बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
इसी दबाव के कारण चक्रधरपुर रेल मंडल (Chakradharpur Railway Division) ने मालगाड़ियों के संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। मालगाड़ियों को रास्ता देने के चक्कर में एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों (Passenger Trains) को आउटर या अन्य स्टेशनों पर घंटों रोक दिया जाता है, जिसका सीधा असर यात्री ट्रेनों के संचालन पर पड़ रहा है।
पर्याप्त पटरियां नहीं, तो कैसे संभव होगा सुचारू संचालन?
सौरभ विष्णु ने सीधे तौर पर रेलवे जीएम को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा, “रेलवे जीएम पूर्वी सिंहभूम (East Singhbhum) के लोगों को बड़े-बड़े आश्वासन देकर गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पर्याप्त रेलवे पटरियां ही उपलब्ध नहीं हैं, तो उसी ट्रैक पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों का सुचारू संचालन एक साथ कैसे संभव होगा?” उन्होंने कहा कि रेलवे लगातार समयपालन (Punctuality) और बेहतर संचालन के खोखले दावे कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि यात्रियों को आज भी ट्रेनों की भारी लेटलतीफी, अचानक रद्दीकरण और परिचालन संबंधी भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रैक क्षमता बढ़ाए बिना सुधार संभव नहीं: जन विकास मंच
जन विकास मंच के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि जब तक रेल मार्गों की क्षमता (Route Capacity) नहीं बढ़ाई जाती, थर्ड और फोर्थ लाइन के काम पूरे नहीं होते और नई पटरियां नहीं बिछाई जातीं, तब तक स्थिति में व्यापक सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज के कई वर्ग और संगठन रेल सेवाओं में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, “मगर रेलवे के इस सबसे बड़े झूठ पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। जब ट्रैक ही नहीं हैं, तो समय पर ट्रेनें कैसे चलेंगी?”
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यात्री ट्रेनों को मिले प्राथमिकता, रेलवे उठाए ठोस कदम
सौरभ विष्णु ने मांग की है कि रेलवे केवल कागजी आश्वासन देने के बजाय ट्रैक क्षमता बढ़ाने, लंबित रेल परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और मालगाड़ियों के बजाय यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि आम यात्रियों को वास्तविक राहत मिल सके। रेलवे की इस लेटलतीफी के मुद्दे पर अब शहर का राजनीतिक माहौल भी गर्म होने लगा है। विभिन्न संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं कि जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों के आम लोग आखिर कब तक रेल की इस लेटलतीफी का शिकार होते रहेंगे।


