
रांची।
रांची में झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) और भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ की राज्य इकाई ने विधानसभा के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इस प्रदर्शन में राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। उनका कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है।
लंबित मांगों पर सरकार घिरी
धरना के दौरान संगठन के संस्थापक शाहनवाज हसन ने कहा कि पिछले छह वर्षों से पत्रकारों को पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि सरकार कई बार आश्वासन दे चुकी है। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए दो साल पहले प्रीमियम लेने के बावजूद अब तक योजना लागू नहीं की गई है।
सुरक्षा और कल्याण पर भी सवाल
शाहनवाज हसन ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जहां पत्रकारों के लिए कोई ठोस कल्याणकारी योजना नहीं चल रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में छह पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और करीब 80 से अधिक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद सरकार ने पत्रकार सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
विधानसभा में सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक कल्पना सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पत्रकार पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा, आवास योजना और सुरक्षा कानून को जल्द लागू करने की मांग की गई।
31 मार्च की डेडलाइन
संगठन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। पत्रकारों का कहना है कि चुनाव से पहले सरकार ने दो महीने में समस्याओं के समाधान का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्य मांगें क्या हैं
पत्रकार संगठनों की प्रमुख मांगों में पेंशन का भुगतान, सभी पत्रकारों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य बीमा, भूमिहीन पत्रकारों को आवास, मान्यता समिति का गठन और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना शामिल है।
सरकार पर बढ़ता दबाव
इस प्रदर्शन के बाद झारखंड सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि सरकार 31 मार्च से पहले इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेती है या मामला अदालत तक पहुंचता है।




