
जमशेदपुर। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी तमाम प्रशासनिक और पर्यावरणीय बाधाएं अब पूरी तरह से दूर हो गई हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) जल्द ही 100 हेक्टेयर भूमि पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण (Phase 1) का निर्माण कार्य शुरू करने जा रही है। मानगो गेस्ट हाउस में जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) सबा आलम अंसारी और क्षेत्रीय वन रेंजरों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इस परियोजना को हरी झंडी मिली।

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बांस को ‘घास’ मानने से दूर हुई वन संरक्षण की बाधा
परियोजना के पहले चरण को गति देने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने पुष्टि की है कि पहले चरण के लिए आवश्यक 100 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तृत भूमि और पर्यावरणीय मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर नई दिल्ली स्थित पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेज दी गई है।
अतीत में आए पर्यावरणीय गतिरोधों पर स्पष्टीकरण देते हुए सांसद विद्युत वरण महतो ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम के हालिया सर्वेक्षण में यह पुष्टि हुई है कि पहले चरण में किसी भी बड़े पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले के एक सर्वेक्षण में तकनीकी त्रुटि के कारण बांस के पौधों को ‘पेड़’ मान लिया गया था, जिससे परियोजना अटक गई थी। सरकारी नियमों के तहत बांस ‘घास’ की श्रेणी में आता है, इसलिए वन संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किए बिना इन्हें आसानी से हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है।
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ढांचागत विकास और गांवों की भूमि का आवंटन
पहले चरण के तहत कुल 100 हेक्टेयर भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से वन भूमि और सरकारी भूमि शामिल है। यह भूमि क्षेत्र पांच स्थानीय गांवों में विभाजित है:
| गांव का नाम | वन भूमि (हेक्टेयर) | सरकारी भूमि (हेक्टेयर) |
| देवशोल | 3.320 | 0.126 |
| कोकपाड़ा | 41.327 | 0.259 |
| रुआशोल | 0.065 | 0.020 |
| बुरुडीह | 38.336 | 0.000 |
| चारचक्का | 13.713 | 0.000 |
एयरपोर्ट की तकनीकी रूपरेखा:
ऑपरेशनल एरिया: 90.429 हेक्टेयर
प्रस्तावित रनवे: 5.216 हेक्टेयर
एप्रन ज़ोन: 0.942 हेक्टेयर
टर्मिनल बिल्डिंग: 0.140 हेक्टेयर
फायर स्टेशन: 0.036 हेक्टेयर
75 हजार रोजगार और नए टाउनशिप का होगा निर्माण
जमशेदपुर से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र के लिए आर्थिक तरक्की का एक बड़ा जरिया बनेगा। सांसद के अनुसार, इस परियोजना से सैकड़ों स्थायी सरकारी नौकरियों के साथ-साथ लगभग 75,000 अस्थायी और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, जमशेदपुर-धालभूमगढ़ कॉरिडोर के बीच एक नए औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउनशिप का विकास भी योजना में शामिल है, जिससे लाखों लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा।
तीन राज्यों के यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
वर्तमान में जमशेदपुर के लोगों को घरेलू उड़ान पकड़ने के लिए करीब ढाई घंटे का सफर तय कर रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट जाना पड़ता है। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट चालू होने से लौहनगरी से यह दूरी घटकर मात्र 1 घंटे की रह जाएगी। एएआई (AAI) के अनुसार, इस हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति इतनी अनूठी है कि इसका व्यावसायिक लाभ तीन राज्यों को मिलेगा:
झारखंड: जमशेदपुर, आदित्यपुर, घाटशिला, चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, मुसाबनी, पोटका और बहरागोड़ा।
ओडिशा: सीमावर्ती जिले जैसे बारीपदा और रायरंगपुर।
पश्चिम बंगाल: पुरुलिया और झाड़ग्राम जिलों के निवासियों को सीधा और सुगम हवाई संपर्क मिलेगा।


