
जमशेदपुर
पोटका विधायक संजीव सरदार ने पूर्वी सिंहभूम जिले में स्टोन माइनिंग के बाद छोड़े गए खतरनाक गड्ढों का मुद्दा जोरदार तरीके से विधानसभा में उठाया। उन्होंने इसे जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
विधायक ने ‘शून्य काल’ के दौरान सदन के समक्ष यह मामला रखते हुए कहा कि जिले के कई स्थानों पर खनन के बाद गहरे और जानलेवा गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं, जिससे लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। खासकर वर्षा ऋतु में इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित लीजधारकों द्वारा अब तक इन गड्ढों का समुचित समतलीकरण नहीं कराया गया है, जो नियमों के विपरीत है। ऐसे में आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई बेहद जरूरी है।
विधायक संजीव सरदार ने सरकार से मांग की है कि इन खतरनाक गड्ढों का शीघ्र समतलीकरण कराया जाए, ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
विधायक संजीव सरदार के सवाल पर सरकार का जवाब – जेएलएसपीएस कर्मियो के लिए संशोधित नियमावली जल्द होगी लागू
पोटका विधायक संजीव सरदार ने झारखंड विधानसभा में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े कर्मियों के हितों का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने राज्य में कार्यरत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के कर्मियों के लिए नई मानव संसाधन नियमावली लागू करने की आवश्यकता पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने स्वीकार किया कि राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्य जेएसएलपीएस के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के “संशोधित मॉडल मानव संसाधन नियमावली 2024” को लागू करने की प्रक्रिया जारी है और इस दिशा में शासी निकाय से आवश्यक सहमति मिल चुकी है।
नियमावली लागू होने से कर्मियों को क्या होगा लाभ
यदि यह नियमावली लागू होती है तो ग्रामीण आजीविका कर्मियों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं, जिनमें सेवा शर्तों की स्पष्टता, वेतन एवं भत्तों में सुधार, पदोन्नति के बेहतर अवसर, नौकरी की स्थिरता और कार्य के अनुरूप अधिकारों का संरक्षण शामिल है। इससे हजारों कर्मियों की कार्य स्थिति मजबूत होगी।
विधायक संजीव सरदार के इस पहल से कर्मियों में नई उम्मीद जगी है। क्षेत्र में उनके प्रयासों की सराहना हो रही है और अब उन्हें उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही इस नियमावली को लागू कर कर्मियों को राहत प्रदान करेगी।



