
जमशेदपुर, 10 जून 2026: देश के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में शामिल मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया द्वारा जमशेदपुर में एक विशेष सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को हृदय संबंधी आपात स्थितियों, समय पर चिकित्सा और जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में मुख्य विशेषज्ञ डॉ. कौशिक मुखर्जी (सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक सर्जरी) और डॉ. सुमंत चटर्जी (सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी) ने लोगों को संबोधित किया।

भारत में तेजी से बढ़ रहे हृदय रोग
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (सीवीडी) एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देश में हुई कुल मौतों में लगभग एक-तिहाई मौतों के लिए हृदय रोग जिम्मेदार रहे। बदलती जीवनशैली, तनाव, धूम्रपान, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण अब युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहा है।
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जीवनरक्षक तकनीक: सीपीआर का महत्व
डॉ. कौशिक मुखर्जी ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को समय रहते सीपीआर दिया जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। विकसित देशों की तरह भारत में भी आम नागरिकों को सीपीआर सिखाना बेहद जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों और कार्यालयों में इसका नियमित प्रशिक्षण होना चाहिए।
बचाव के उपाय और समय पर इलाज
डॉ. सुमंत चटर्जी ने बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों (जैसे छाती में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान) की पहचान कर गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम हृदय को स्वस्थ रखने के मूल मंत्र हैं।
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मरीज काशी नाथ सिंह ने साझा किया अनुभव
इस सत्र में हाल ही में सफल कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (CABG) सर्जरी कराने वाले मरीज काशी नाथ सिंह ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने डॉ. कौशिक मुखर्जी और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल की उत्कृष्ट सेवाओं और डॉक्टरों के संवेदनशील व्यवहार ने उन्हें नया जीवन दिया है। इसके बाद प्रतिभागियों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।


