जमशेदपुर: नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रति छात्र-छात्राओं को जागरूक करने और इसके क्रियान्वयन को बेहतर ढंग से समझाने के उद्देश्य से 30 मार्च 2026 को जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय (Jamshedpur Women’s University) के सिधगोड़ा परिसर में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। स्वर्णरेखा ऑडिटोरियम में एनईपी सारथी (NEP Saarthi) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को शिक्षा प्रणाली में हो रहे बड़े बदलावों की विस्तृत जानकारी दी गई।
गरिमामयी उपस्थिति और दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति डॉ. एला कुमार (Dr. Ela Kumar) के गरिमामयी मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत एनईपी सारथियों द्वारा NEP 2020 की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन एवं पौधारोपण के माध्यम से मंचासीन अतिथियों का विधिवत अभिनंदन किया गया। इस खास अवसर पर कुलपति के अलावा कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर, प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहू, मुख्य वक्ता डॉ. रमा सुब्रह्मणियन और एनईपी सारथी समन्वयक डॉ. सोनाली सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
मुख्य वक्ता ने समझाए बहुविषयक शिक्षा और ABC ID के फायदे
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. रमा सुब्रह्मणियन ने NEP 2020 के प्रमुख घटकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत शैक्षणिक समानता, बहुविषयक (Multidisciplinary) एवं अनुभवात्मक शिक्षण के महत्व को समझाया।
छात्राओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘मल्टीपल एंट्री-एग्जिट प्रणाली’ (Multiple Entry-Exit System) और ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC ID) की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि कैसे ABC ID के माध्यम से क्रेडिट संचित (Credit Accumulation) और स्थानांतरण किया जा सकता है, तथा डिजिलॉकर (DigiLocker) के जरिए इसे कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
FYUGP पाठ्यक्रम, इंटर्नशिप और उपस्थिति नियमों पर जोर
डॉ. सुब्रह्मणियन ने NEP के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUGP) की समग्र संरचना, ऐच्छिक विषयों के चयन और पांचवें सेमेस्टर के बाद अनिवार्य इंटर्नशिप के प्रावधानों को भी स्पष्ट किया। इसके अलावा, परीक्षा संबंधी नए नियमों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि अब आंतरिक और बाह्य दोनों परीक्षाओं में सम्मिलित होना अनिवार्य है। छात्रों में अनुशासन और कक्षाओं में सक्रिय सहभागिता बढ़ाने के लिए संशोधित उपस्थिति नीति लागू की गई है, जिसके तहत उपस्थिति के लिए 5 से 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही शानदार भागीदारी
व्याख्यान के बाद एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं ने नई शिक्षा नीति से जुड़े अपने कई संदेह दूर किए। इसके पश्चात प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहू ने अपना अध्यक्षीय संबोधन दिया और अंत में एनईपी सारथियों ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. दीपा शरण, डॉ. कामिनी कुमारी, डॉ. ग्लोरिया पूर्ति, डॉ. छगन लाल अग्रवाल, डॉ. स्वेता प्रसाद, डॉ. केया बनर्जी समेत विश्वविद्यालय के अनेक गणमान्य शिक्षाविद् उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों की छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को बेहद सफल और ज्ञानवर्धक बना दिया।



