
जमशेदपुर। मानगो वन विभाग सभागार में जमशेदपुर वन प्रमंडल और गीता थिएटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित निःशुल्क समर कैंप का भव्य समापन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बच्चों ने अपनी बेहतरीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नुक्कड़ नाटकों से उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। विशेष रूप से गांधी कुष्ठ आश्रम के बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘नशा करे नाश’ ने समाज को एक कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया।

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दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ आगाज
समारोह का शुभारंभ अतिथि पूर्वी घोष, चंचल भाटिया, ताजदार आलम, गोविंद विद्यालय के निदेशक राजेश शर्मा, प्रिंसिपल सुनीता त्रिपाठी और प्रधानमंत्री उच्च विद्यालय बावनगोड़ा के प्रधानाचार्य शाहिद इक़बाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का स्वागत पौधा और अंग वस्त्र देकर किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत राम नृत्य स्टूडियो के निर्देशक सह नृत्य प्रशिक्षक राम मारडी द्वारा निर्देशित ‘गणेश वंदना’ से हुई। इसके बाद संपूर्ण आश्रय संस्था के सदस्यों ने किशोर कुमार के सदाबहार गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
बच्चों ने नाटकों के जरिए दिया पर्यावरण और नशा मुक्ति का संदेश
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद दो प्रभावशाली नाटकों का मंचन किया गया। विश्व धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर गांधी आश्रम के कुष्ठ परिवार के बच्चों ने ‘नशा करें नाश’ नाटक के जरिए नशे के दुष्प्रभावों को दिखाया। वहीं, वन प्रमंडल के दिशानिर्देश पर समर कैंप के बच्चों ने पर्यावरण, जलवायु और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित नाटक ‘धरती की पुकार’ की शानदार प्रस्तुति दी। दोनों नाटकों के बाद सभी ने सामूहिक रूप से नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।
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बच्चों को मोबाइल से दूर प्रकृति के करीब लाना था उद्देश्य
गीता थिएटर की अध्यक्ष गीता कुमारी ने बताया कि इस बार समर कैंप जमशेदपुर के दो अलग-अलग हिस्सों में आयोजित हुआ। पहला कैंप 15 से 25 मई तक मानगो वन विभाग सभागार में और दूसरा 24 से 30 मई तक कुष्ठ परिवार के वंचित बच्चों के लिए बाराद्वारी स्थित गांधी आश्रम में लगा। कैंप में बच्चों को अभिनय, नृत्य, कला, गुड टच-बैड टच, नागरिक सुरक्षा, विधिक जानकारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रशिक्षण दिया गया।
वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी ने कहा कि इस कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल और पाठ्यपुस्तकों की दुनिया से बाहर निकालकर प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपने सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वहीं, प्रशिक्षकों और सहयोगी संस्थाओं (सुंदरम, संपूर्ण आश्रय, आरंभ आदि) को ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड सम्मान 2026’ से सम्मानित कर उनका आभार व्यक्त किया गया।



