Jamshedpur NEWS: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में राष्ट्रीय दिवस (तिरंगा अंगीकरण दिवस) के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में संपन्न हुआ। इसमें संस्थान के प्राध्यापकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ सहभागिता की।
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राष्ट्रीय ध्वज और युवाओं की जिम्मेदारी
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, लोकसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव तीर्थंकर दास और विशिष्ट अतिथि सीएसआईआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। एनआईटी के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने तिरंगा अंगीकरण दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता और गरिमा का सर्वोच्च प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को देशभक्ति और नवाचार के जरिए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। वहीं, तीर्थंकर दास ने भी युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने की अपील की।
देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस अवसर पर देशभक्ति की भावना से जुड़ी आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित हुईं। डॉ. इंद्राणी सूत्रधार, डॉ. विशेष रंजन कर और डॉ. शंकर राय ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी को भावविभोर कर दिया। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और उद्यमिता पर विशेष जोर
उद्घाटन सत्र के बाद डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने “बौद्धिक संपदा अधिकार, उद्यमिता एवं मिशन-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर एक अहम और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए नवाचार और उद्यमिता के बीच मजबूत तालमेल नितांत आवश्यक है। उनका स्पष्ट मानना था कि अनुसंधान और ज्ञान को केवल शोध-पत्रों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे पेटेंट, स्टार्टअप और समाजोपयोगी उत्पादों में तब्दील करना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
व्याख्यान के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित हाइड्रोजन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में समन्वित प्रयास पर जोर दिया गया। क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और डिजिटल सुधारों के कारण देश में आईपी फाइलिंग में हुई भारी वृद्धि पर भी विस्तृत चर्चा हुई। अंत में एक संवादात्मक सत्र हुआ, जिसमें शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने स्टार्टअप, बौद्धिक संपदा संरक्षण और पेटेंट से जुड़े कई सवाल पूछे। इस सफल आयोजन ने एनआईटी जमशेदपुर की नवाचार, उद्यमिता और विकसित भारत 2047 के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया है।
