
उद्योगपति नहीं, हर दिल में बसने वाले राष्ट्र निर्माता थे जेआरडी टाटा
इतिहास जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जेआरडी टाटा) को एक दूरदर्शी उद्योगपति, अग्रणी विमान चालक और आधुनिक भारतीय उद्योग के शिल्पकार के रूप में याद करता है। हालांकि, जिन लोगों ने उन्हें करीब से जाना, वे उनकी व्यावसायिक सफलता से ज्यादा उनकी मानवीयता और विनम्रता के कायल थे। वे एक ऐसे विलक्षण नेता थे, जो बोलने से पहले सुनने में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि समाज का हर व्यक्ति सम्मान और गरिमा का समान अधिकारी है।


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जब कतार तोड़ने से मना करने वाले कर्मचारी का जेआरडी ने किया समर्थन
बॉम्बे हाउस की एक चर्चित घटना उनके चरित्र की गहराई को दर्शाती है। एक दिन वे लिफ्ट के लिए कतार में खड़े थे। लिफ्ट ऑपरेटर ने उन्हें कतार तोड़कर आगे जाने की अनुमति नहीं दी। जब बाद में उस कर्मचारी के तबादले की बात आई, तो जेआरडी टाटा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, “यह व्यक्ति सिद्धांतों का पक्का है, इसे दंडित कैसे किया जा सकता है?” उनके लिए सम्मान कभी पद से नहीं, बल्कि चरित्र और आचरण से मिलता था।
जमशेदपुर और टाटा स्टील ‘पीपल-फर्स्ट’ संस्कृति की मिसाल
1938 से 1984 तक टाटा स्टील के चेयरमैन के रूप में जेआरडी टाटा ने तकनीकी आधुनिकीकरण को नई दिशा दी। उनका स्पष्ट मानना था कि किसी भी संस्थान की वास्तविक प्रगति उसके लोगों से होती है। उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण, स्वास्थ्य सेवा और परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी इसी सोच ने जमशेदपुर को विश्वस्तरीय और एक आदर्श औद्योगिक नगर में बदल दिया।
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सस्टेनेबिलिटी और 2045 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य
जिम्मेदार व्यवसाय (Responsible Business) के वैश्विक मानक बनने से दशकों पहले जेआरडी टाटा ने नैतिकता को उद्योग का अभिन्न हिस्सा बनाया। आज टाटा स्टील उनकी इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और वर्ष 2045 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।


