
रांची।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता एवं बहरागोड़ा के पूर्व विधायक Kunal Sarangi ने आदिवासी समाज के महान नेता दिशोम गुरु Shibu Soren को पद्मभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इसे गुरुजी के दशकों लंबे संघर्ष और योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता बताया।
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लेकिन झारखंड की भावना इससे आगे
कुणाल षांडगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पद्मभूषण सम्मान सम्मानजनक है, लेकिन पूरे झारखंड की भावना है कि गुरुजी शिबू सोरेन को भारत रत्न मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि झारखंड की जनता की सामूहिक भावना और आदिवासी समाज की आवाज है।
सोशल मीडिया के माध्यम से रखी बात
झामुमो नेता ने यह प्रतिक्रिया अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि राज्य की जनता को इससे कम मंजूर नहीं है, क्योंकि करोड़ों झारखंडियों के दिलों में बाबा शिबू सोरेन पहले से ही भारत रत्न हैं और रहेंगे। उनके अनुसार, सम्मान का असली मूल्य जनता के दिलों में होता है, और गुरुजी को वह सम्मान वर्षों पहले मिल चुका है।
आदरणीय गुरुजी शिबू सोरेन जी को पद्म भूषण सम्मान से घोषणा के लिए, केंद्र सरकार का आभार।
लेकिन पूरे झारखंड की भावना है उन्हें “भारत रत्न” मिलना चाहिए था
और
राज्य को जानता को इससे कम मंजूर नहीं क्योंकि करोड़ों झारखंडियों के दिलों में बाबा “भारत रत्न” थे और रहेंगे । #shibusoren… pic.twitter.com/ALmBu2In13
— Kunal Sarangi 🇮🇳 (@KunalSarangi) January 25, 2026
आदिवासी संघर्ष के प्रतीक हैं गुरुजी
कुणाल षांडगी ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना और संघर्ष के प्रतीक हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया और आदिवासी समाज को राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक पहचान दिलाई।
झारखंड राज्य निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन में गुरुजी की भूमिका ऐतिहासिक रही है। दशकों के आंदोलन, बलिदान और संघर्ष के बाद वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका। इस संघर्ष की अगुवाई करने वाले शिबू सोरेन को “दिशोम गुरु” की उपाधि यूं ही नहीं मिली।
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भारत रत्न की मांग को फिर मिली धार
कुणाल षांडगी के इस बयान के बाद एक बार फिर गुरुजी को भारत रत्न देने की मांग तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है और केंद्र सरकार को इसकी अनुशंसा भेजी जा चुकी है।
जनभावना का सम्मान जरूरी
झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि यदि केंद्र सरकार गुरुजी को भारत रत्न से सम्मानित करती है, तो यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा, बल्कि पूरे आदिवासी समाज और झारखंड की अस्मिता का राष्ट्रीय सम्मान होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार झारखंड की इस प्रबल जनभावना का सम्मान करेगी।


