
जमशेदपुर: भारतीय संस्कृति, प्रकृति की हरियाली और उल्लास के प्रतीक सावन महीने के खुशनुमा माहौल में लौहनगरी जमशेदपुर पूरी तरह से सराबोर है। इसी कड़ी में शहर के साकची (Sakchi) स्थित एक होटल में श्री विनायक इवेंट्स (Shree Vinayak Events) की ओर से भव्य ‘सावन सहेली मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस मनमोहक उत्सव में 60 से अधिक महिलाओं ने अपनी पारंपरिक हरी साड़ियों, लहरिया और आकर्षक श्रृंगार के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं की ऊर्जा, सावन के गीत और ढोलक की थाप ने पूरे माहौल को उत्सव के उल्लास से भर दिया।


मीना प्रसाद के सिर सजा ‘सावन क्वीन’ का ताज
उत्सव के दौरान महिलाओं और सहेलियों के बीच आपसी प्रेम व सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए कई तरह की मनोरंजक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में महिलाओं के आत्मविश्वास, पहनावे और प्रस्तुति को परखा गया। निर्णायक मंडली (मिताली दास गुप्ता और गुरदयाल सिंह कोटली) के फैसले के आधार पर मीना प्रसाद को ‘सावन क्वीन’ (Sawan Queen) के प्रतिष्ठित खिताब से नवाजा गया। इसके अलावा ‘सर्वश्रेष्ठ श्रृंगार’ के लिए जोनी सिंह और ‘सर्वश्रेष्ठ नृत्य’ के लिए संदीप कौर को विजेता घोषित किया गया। सभी विजेताओं को उपहार और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
हरियाली से सजा हॉल, इन अतिथियों ने बढ़ाई रौनक
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। पूरा हॉल हरे रंग के खूबसूरत गुब्बारों और सावन की थीम पर आधारित मनमोहक कलाकृतियों से सजाया गया था। इस रंगारंग कार्यक्रम में समाजसेविका पूर्वी घोष, कांग्रेस की जिला उपाध्यक्ष मंजीत आनंद, झामुमो नेत्री चरनजीत कौर भाटिया, आशा सिंह, पूनम वर्मा, प्रीति गुप्ता और आरफीन अशरफ ने अतिथि के रूप में शिरकत की। आयोजकों ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
‘सावन अपनी संस्कृति से जुड़ने का पर्व है’
इस खास मौके पर श्री विनायक इवेंट्स की लवली सिंह ने कहा, “सावन उत्सव केवल मनोरंजन का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं से जुड़ने का पर्व है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को एक ऐसा मंच देना है जहां वे अपनी सहेलियों के साथ फुर्सत के कुछ पल बिता सकें।” समारोह के अंत में सभी ने सात्विक भोजन का आनंद लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री विनायक इवेंट्स की लवली सिंह, जगजीत सिंह, सुमित मिश्रा, परमिंदर सिंह और जगतार नागी का विशेष योगदान रहा।



