
जमशेदपुर: झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026’ (MMDR Act 2026) को लेकर तीखा हमला बोला है। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने इस एक्ट को संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार करार दिया है।
जमशेदपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुणाल षाड़ंगी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे झारखण्ड की जनता के अधिकारों की बात करने के बजाय कॉरपोरेट घरानों और निजी कंपनियों के प्रवक्ता की तरह भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को राज्य के साथ इस तरह की मनमानी नहीं करने दी जाएगी।
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‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिल रहा राजस्व, भाजपा सांसद रहे मौन’
झामुमो प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए राज्य सरकारों को अपने सीमा क्षेत्र के खनिजों पर सेस (उपकर) लगाने का अधिकार दिया था। इसके बाद झारखण्ड सरकार ने ‘जेएमबीएल’ (JMBL) एक्ट बनाकर सेस वसूलना शुरू किया।
राजस्व के आंकड़े: सेस के जरिए राज्य को पहले वर्ष 1700 करोड़ रुपये और दूसरे वर्ष 7500 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। चालू वित्तीय वर्ष में यह आय 14,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
जनकल्याणकारी योजनाएं: इसी राजस्व के दम पर राज्य में ‘मंईयां सम्मान योजना’ और ‘अबुआ आवास योजना’ जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं।
षाड़ंगी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर केंद्र के इस नए एक्ट से ये योजनाएं बंद होती हैं, तो इसके लिए पूरी तरह से भाजपा के वे सांसद जिम्मेदार होंगे, जिन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में झारखण्ड के हितों के लिए कभी मुंह नहीं खोला।
‘कोयला कोई आईफोन नहीं, भाजपा को सता रही कॉरपोरेट की चिंता’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की हालिया टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए षाड़ंगी ने कहा, “कोयला कोई आईफोन (iPhone) नहीं है कि दुबई में सस्ता मिलने पर लोग वहां से खरीद कर ले आएंगे।” उन्होंने समझाया कि कोयले की खरीद हमेशा उसके ग्रेड, रेलवे फ्रेट (भाड़े) और संयत्रों की कनेक्टिविटी के आधार पर होती है। भाजपा नेताओं को यह चिंता सता रही है कि कॉरपोरेट घराने कोयला कैसे खरीदेंगे, जबकि एक राजनीतिक दल के रूप में उनकी प्राथमिकता झारखण्ड की गरीब जनता का हित होना चाहिए।
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खनन का ‘हिडन कॉस्ट’ और उग्र आंदोलन की चेतावनी (Highlights)
खनन का छिपा हुआ खर्च: षाड़ंगी ने स्पष्ट किया कि खनन के कारण आदिवासियों और मूलवासियों का विस्थापन होता है। यूसीआईएल (UCIL) क्षेत्र में विकिरण जैसी स्वास्थ्य समस्याएं, प्रदूषण और भारी वाहनों से टूटने वाली सड़कों की मरम्मत का पूरा खर्च राज्य सरकार को उठाना पड़ता है। यह माइनिंग का ‘हिडन कॉस्ट’ है, जिसका बोझ केंद्र सरकार नहीं उठाती, इसलिए खनिजों पर सेस वसूलना राज्य का संवैधानिक हक है।
कोयला माफिया: भाजपा द्वारा झामुमो पर कोयला माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि धनबाद में कोयला माफियाओं को किस पार्टी के नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, यह बात किसी से छिपी नहीं है।
आंदोलन की चेतावनी: उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक केंद्र सरकार एमएमडीआर एक्ट 2026 जैसे काले कानून को वापस नहीं लेती, झामुमो सड़क से लेकर सदन तक अपना उग्र विरोध जारी रखेगा। 19 सितंबर को प्रखंड मुख्यालयों पर हुए लोकतांत्रिक प्रदर्शन से भाजपा में बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है।

