
जमशेदपुर.
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में सोमवार से “कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम फॉर Master Trainers in Artificial Intelligence and Digital Technology” का विधिवत शुभारंभ हुआ. डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के LHC-212 में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 25 सितंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य एआई और डिजिटल तकनीक के तेजी से बदलते दौर में मास्टर ट्रेनर्स के ज्ञान, कौशल एवं व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना है.
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वरिष्ठ शिक्षाविदों व विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के मुख्य संरक्षण में किया जा रहा है. मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. परमानंद कुमार एवं कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार शॉ कार्यक्रम के संरक्षक हैं. एनआईटी जमशेदपुर के रजिस्ट्रार (प्रभारी) प्रो. सरोज कुमार सारंगी तथा PSSCIVE भोपाल के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल कार्यक्रम निदेशक के रूप में जुड़े हैं. समन्वयकों की भूमिका डॉ. आर. रविचंद्रन (PSSCIVE, भोपाल), डॉ. अभिषेक शर्मा और डॉ. जितेश प्रधान (एनआईटी जमशेदपुर) निभा रहे हैं.
पारंपरिक गरिमा के साथ हुआ उद्घाटन समारोह
उद्घाटन सत्र की शुरुआत अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई. तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का अभिनंदन किया गया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई. समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन, राष्ट्रगान, वंदे मातरम् और सामूहिक छायाचित्र के साथ हुआ.
तकनीक के दौर में निरंतर सीखने और कौशल उन्नयन की जरूरत : प्रो. सूत्रधार
अपने अध्यक्षीय संबोधन में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि वर्तमान तकनीक-प्रधान वातावरण में निरंतर कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण अनिवार्य है. क्षमता निर्माण न केवल व्यक्तिगत व्यावसायिक विकास के लिए, बल्कि संस्थागत प्रगति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व है कि वे शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नवाचार करने व समाज के लिए सार्थक योगदान देने के अवसर प्रदान करें. उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग तथा अंतर्विषयक सहभागिता पर विशेष जोर दिया.
ज्ञान और संवाद साझा करने का सशक्त मंच : डॉ. रविचंद्रन
PSSCIVE भोपाल के एक्सटर्नल प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. आर. रविचंद्रन ने कहा कि यह कार्यक्रम विशेषज्ञों और शिक्षकों के बीच ज्ञान-साझाकरण, संवाद और प्रशिक्षण का सशक्त माध्यम बनेगा. उन्होंने प्रतिभागियों से सभी सत्रों में सक्रिय भागीदारी दर्ज कराने और यहां सीखे गए कौशल को अपने-अपने संस्थानों व समाज के हित में प्रयोग करने का आह्वान किया.
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नवाचार और सहयोग की संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
पांच दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में एआई एवं डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़ी विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. आयोजकों को विश्वास है कि यह कार्यक्रम मास्टर ट्रेनर्स की व्यावसायिक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ निरंतर सीखने, नवाचार और आपसी सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा.


