
जमशेदपुर: शहर के कदमा स्थित कूड़ी मोहंती ऑडिटोरियम में रविवार की शाम साहित्य, कला और संस्कृति का एक भव्य समागम देखने को मिला। बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ और विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ का शानदार आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में समाज और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित कर दिवंगत साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. वीणा रानी की स्मृतियों को नमन किया गया।


वैदिक मंगलाचरण और ‘पंचतत्व’ नृत्य से कलात्मक शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और डॉ. वीणा रानी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। डॉ. पद्मा झा के सुमधुर ‘सहयोग गीत’ और उपासना सिन्हा की आध्यात्मिक सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को चेतनामय कर दिया। इसके बाद डीबीएमएस कॉलेज फॉर एजुकेशन की छात्राओं ने ‘पंचतत्व’ पर केंद्रित एक मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया। पामेला घोष दत्ता के निर्देशन में सुमेधा दत्ता, तृषा सरकार और आकांक्षा दास समेत अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहित्य समाज की संवेदनशील चेतना का आधार: सरयू राय
समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे विधायक सरयू राय ने अपने संबोधन में साहित्य और कला को समाज की संवेदनशील चेतना का मुख्य आधार बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा ने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर ‘सहयोग निधि सम्मान’, ‘साहित्य सृजन सम्मान’, ‘वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान’ और ‘डॉ. वीणा रानी प्रभा सम्मान’ से कई साहित्यिक विभूतियों को नवाजा गया।
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‘उर्वशी’ नृत्य-नाटिका के जीवंत मंचन ने मोहा मन
सांस्कृतिक सत्र का मुख्य आकर्षण राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी कृति ‘उर्वशी’ पर आधारित नृत्य-नाटिका रही। जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने इसका शानदार मंचन किया। डॉ. रागिनी भूषण की पटकथा, मसूर सिद्दीकी के संगीत और अवतार सिंह के नाट्य निर्देशन में निवेदिता महापात्र (उर्वशी) और शिवम कुमार सिंह (राजा पुरुरवा) ने बेहतरीन अभिनय कर अमिट छाप छोड़ी।
कार्यक्रम के अंत में सरयू राय और डॉ. मीरा मुंडा ने सभी कलाकारों और निर्देशकों को सम्मानित किया। संस्था की सचिव डॉ. भारती कुमारी के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ इस साहित्यिक महाकुंभ का समापन हुआ।



