
जमशेदपुर: शहर के मानगो स्थित संकोसाईं, रोड नंबर एक के हरि मंदिर परिसर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणेश उत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है। इस पूजा की शुरुआत 1995 में हुई थी और तब से आस्था की यह परंपरा अनवरत जारी है।
बिना चंदा मांगे अपने बलबूते होता है भव्य आयोजन
पूजा समिति के अध्यक्ष एवं संस्थापक गौरी शंकर आचार्य ने बताया कि वे गणेश पूजा के लिए कहीं से भी चंदा नहीं लेते हैं।पूरा कार्यक्रम पूरी तरह से अपने बलबूते पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, जो श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से कुछ सहयोग देना चाहते हैं, वे सीधे पूजा स्थल पर आकर अपना योगदान दे जाते हैं।उन्होंने बताया कि मंगलवार को विशाल भोग का आयोजन किया गया था, जिसमें दोपहर 1:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक 5000 से अधिक लोगों ने महाभोग ग्रहण किया। जिन लोगों को प्रसाद घर ले जाना था, उन्हें हांडी, मटकुरी और बर्तनों में भी भोग उपलब्ध कराया गया।
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बुधवार को भजन संध्या, संस्थापक ने गालूडीह में भी बनाए हैं तीन मंदिर
गौरी शंकर आचार्य ने बताया कि बुधवार की रात एक विशेष भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जो देर रात तक चलेगा।एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उन्होंने गालूडीह में भी तीन मंदिर (शिव, काली और शनि मंदिर) स्थापित किए हैं, जिनकी प्राण प्रतिष्ठा शिवरात्रि के अवसर पर की गई थी।उन्होंने दृढ़ संकल्प लेते हुए कहा कि जब तक सांस रहेगी, तब तक मानगो में गणेश पूजा का यह आयोजन यूं ही चलता रहेगा।उत्सव को लेकर पूरे रास्ते को रंग-बिरंगे चुन्नी बल्बों से बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है, और पूजा पंडाल का मुख्य प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।


