
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर के युवा सिख धर्म प्रचारक और विचारक ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी थाईलैंड (बैंकाक) में अपनी दो महीने की सफल धार्मिक प्रचार यात्रा पूरी कर शनिवार को स्वदेश लौट आए हैं। वहां उनके द्वारा किए गए गुरमत प्रचार के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।


स्वदेश लौटने पर स्थानीय सिख समुदाय ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान ज्ञानी हरविंदर सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि थाईलैंड में प्रवासी सिखों का सिखी, गुरबाणी और गुरमत के प्रति अप्रत्याशित लगाव देखकर उन्हें गहरी संतुष्टि मिली है।
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25 मई से 25 जुलाई तक चला गुरमत प्रचार का लंगर
ज्ञानी हरविंदर सिंह ने बैंकाक के चरणसणीत्वोंग स्थित गुरु नानक सेंटर एसोसिएशन गुरुद्वारा साहिब में 25 मई से 25 जुलाई 2026 तक वहां की संगत के बीच गुरमत और रहत मर्यादा का खूब प्रचार किया।
उनके इस समर्पण और सेवा भाव को देखते हुए गुरुद्वारा साहिब के उपाध्यक्ष सरदार रणजीत सिंह, कोषाध्यक्ष कुलवंत सिंह के साथ-साथ रविंदरपाल सिंह और भूपिंदर सिंह ने उन्हें सिरोपा भेंट कर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
“राजनीति से परे, प्रधान नहीं सेवक बनकर करते हैं सेवा”
जमशेदपुर में गुरमत प्रचार सेंटर से जुड़े हरविंदर सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए थाईलैंड के सिखों, विशेषकर गुरु नानक सेंटर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजपाल सिंह नारंग की सेवा भावना और धार्मिक निष्ठा की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि, “थाईलैंड के सिखों में सेवा भावना अद्भुत है। वहां राजनीति से परे हटकर, लोग गुरुघर के प्रधान नहीं बल्कि सेवक बनकर सेवा करते हैं। यह सिख धर्म की मूल शिक्षा को रेखांकित करता है, जहां कोई पद या राजनीतिक प्रभाव सेवा भावना पर हावी नहीं होता।”
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जमशेदपुर के युवाओं से की विशेष अपील
ज्ञानी हरविंदर सिंह ने अपनी इस यात्रा को सिख धर्म के वैश्विक विस्तार का प्रमाण बताया। उन्होंने जमशेदपुर के युवाओं से भी अपील की कि वे सिख धर्म की इस निस्वार्थ सेवा भावना को अपनाएं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के समानता और विश्व शांति के संदेश को वैश्विक स्तर पर फैलाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, ताकि हर दिल तक गुरु साहिब का संदेश पहुंच सके।



