
आदित्यपुर: आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह के जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। गुरुवार को राजधानी रांची में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से उनकी खास मुलाकात ने इन राजनीतिक चर्चाओं को और बल दे दिया है। हालांकि, डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसे महज एक ‘शिष्टाचार मुलाकात’ करार दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
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प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से की खास मुलाकात
रांची में प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई इस अहम मुलाकात के दौरान भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित थे। ज्ञात हो कि इससे पूर्व बीते जुलाई महीने में भी अंकुर सिंह ने रांची में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। उस समय भी इसे शिष्टाचार भेंट ही कहा गया था, लेकिन लगातार हो रही इन मुलाकातों से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे किसी भी वक्त औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
दिग्गजों का मिलता रहा है समर्थन
इन राजनीतिक चर्चाओं में इसलिए भी दम है क्योंकि अंकुर सिंह को हमेशा से भाजपा के दिग्गज नेताओं का मौन और मुखर समर्थन मिलता रहा है। आदित्यपुर नगर निगम के चुनाव में उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ था। वर्तमान में भी विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें अर्जुन मुंडा का आशीर्वाद मिलता रहता है। इसके अतिरिक्त, ओडिशा के पूर्व राज्यपाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी अंकुर सिंह को हर वक्त समर्थन और मार्गदर्शन मिलता रहा है, जिससे उनकी भाजपा से नजदीकियों को नकारा नहीं जा सकता।
चाचा मलखान सिंह की विरासत का मिलेगा लाभ
राजनीतिक जानकारों की मानें तो अंकुर सिंह की पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि भी भाजपा के अनुकूल है। वे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे कद्दावर नेता अरविंद सिंह उर्फ ‘मलखान सिंह’ के भतीजे हैं। मलखान सिंह ने लंबे समय तक भाजपा में रहकर क्षेत्र की जनता के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अपने चाचा के व्यापक राजनीतिक अनुभव का लाभ डिप्टी मेयर अंकुर सिंह को मिलेगा। यदि वे भाजपा के बैनर तले अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं, तो इससे न केवल कोल्हान में पार्टी संगठन को मजबूती मिलेगी, बल्कि वे जनहित के कार्यों को भी अधिक प्रभावशाली ढंग से धरातल पर उतार सकेंगे।

