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भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जिसमें रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। टिकट बुक करना तो अब मोबाइल टैप जितना आसान हो गया है, लेकिन स्टेशन पर पहुंचने के बाद असली जद्दोजहद शुरू होती है- अपनी ट्रेन का डिब्बा (कोच) ढूंढना। टिकट पर लिखे GS, SL, B1, M1 जैसे कोड अक्सर यात्रियों को कन्फ्यूज कर देते हैं। कई बार सही जानकारी न होने के कारण लोग गलत डिब्बे में चढ़ जाते हैं या प्लेटफॉर्म पर अपना कोच ढूंढते हुए दौड़ लगाते नजर आते हैं। यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक बेहद उपयोगी जानकारी साझा की है।
रेलवे ने कहा- ‘अब और नहीं!’
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक इंफोग्राफिक शेयर किया है। इसका उद्देश्य यात्रियों को कोच कोड्स के बारे में जागरूक करना है। रेलवे ने साफ शब्दों में कहा है- “क्या आप भी कोच कोड देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं? अब और नहीं! इस लिस्ट को सेव करें और अपने सफर को स्मार्ट बनाएं।” रेलवे का नारा ‘सही जानकारी, सुखद सफर’ इस पहल के जरिए बिल्कुल सटीक बैठता है।
जानें किस कोच कोड का क्या है मतलब (Coach Code List)
अगर आप भी भविष्य में ट्रेन से सफर करने वाले हैं, तो इन कोड्स का मतलब जरूर जान लें:
GS (सामान्य कोच): यह जनरल डिब्बा होता है। इसमें यात्रा करने के लिए पहले से रिजर्वेशन की आवश्यकता नहीं होती है। जनरल टिकट लेकर आप इसमें सफर कर सकते हैं।
SL (स्लीपर कोच): यह ट्रेन का सबसे लोकप्रिय डिब्बा है, जिसमें सोने के लिए बर्थ होती है, लेकिन इसमें एसी (AC) नहीं होता।
H1 (I ए.सी. कोच): यह फर्स्ट एसी (1st AC) का कोड है। यह ट्रेन का सबसे महंगा और आरामदायक कोच होता है, जिसमें केबिन और कूपे बने होते हैं।
A1 (II ए.सी. कोच): यह सेकंड एसी (2nd AC) का डिब्बा है। इसमें स्लीपर की तरह सीटें होती हैं लेकिन यह पूरी तरह वातानुकूलित (AC) होता है और इसमें पर्दे लगे होते हैं।
B1 (III ए.सी. कोच): यह थर्ड एसी (3rd AC) का कोच है। मध्यम वर्ग के बीच यह सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला एसी कोच है।
M1 (III ए.सी. इकोनॉमी): यह थर्ड एसी इकोनॉमी कोच है। यह सामान्य थर्ड एसी से थोड़ा किफायती होता है और इसमें आधुनिक सुविधाएं ज्यादा होती हैं।
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अपने सफर को बनाएं स्मार्ट
इन कोड्स को याद रखने या अपने फोन में सेव कर लेने से आपका सफर काफी आसान हो जाएगा। जब आप स्टेशन पहुंचेंगे और डिस्प्ले बोर्ड पर ट्रेन के कोच की पोजीशन देखेंगे, तो आप आसानी से समझ जाएंगे कि आपका डिब्बा (जैसे B1 या SL) प्लेटफॉर्म पर किस जगह आकर रुकेगा। इससे न सिर्फ आपके समय की बचत होगी, बल्कि यात्रा की शुरुआत बिना किसी तनाव और भागदौड़ के होगी।


