
● अभियुक्तों ने कहा आरोप झूठा, टेल्को थाना एवं मजिस्ट्रेट, टाटा मोटर्स मैनजमेंट की मिलीभगत


● एक घन्टें विलंब से पहुंचीं आईओ रुमिला एक्का, लगभग एक घँटे तक चली इंक्वायरी
जमशेदपुर।
टाटा मोटर्स मुख्य गेट पर बीते नौ जून को विधवा नीतू सिंह के समर्थन में किन्नरों द्वारा प्रदर्शन मामले में सोमवार को टेल्को थाने में पूछताछ हुई। इस प्रकरण में बाईसिक्स कर्मी स्व. आलोक रंजन की विधवा नीतू सिंह, आजसू जिला प्रवक्ता अप्पु तिवारी, भाजपा महानगर प्रवक्ता अंकित आनंद, टेल्को यूनियन के मज़दूर नेता हर्षवर्धन सिंह समेत अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ है। मजिस्ट्रेट जगदीश हाज़रा के बयान पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, उपद्रव करने और लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोपों में टेल्को थाना में एफआईआर संख्या 107/2020 दर्ज़ है। पिछले दिनों दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41A के तहत प्राप्त नोटिस के आलोक में अभियुक्तों ने टेल्को थाना में केस की अनुसंधान पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना लिखित पक्ष सौंपा। जाँच अधिकारी रुमिला एक्का ने लगभग एक घन्टे तक सभी से अलग-अलग पूछताछ कर बयान दर्ज़ किया। इससे पूर्व निर्धारित समय के तहत सुबह दस बजे ही नीतू सिंह, अप्पु तिवारी, हर्षवर्धन सिंह और अंकित आनंद टेल्को थाना पहुँचें थे लेकिन जाँच अधिकारी रुमिला एक्का गैरहाजिर थी। इस दरम्यान लिखित पत्र रिसीव करने से टेल्को थाना आनाकानी करती रही। जाँच अधिकारी के आने के बाद सभी का लिखित पत्र रिसीव कर लिया गया। इधर क़रीब एक घँटे तक अलग अलग चले पूछताछ के क्रम में अभियुक्तों ने ख़ुद को निर्दोष बताते हुए मामले को झूठा करार दिया। कहा की विधवा नीतू सिंह की आवाज़ को दबाने के लिए दंडाधिकारी जगदीश हाज़रा, टेल्को थाना प्रभारी अखिलेश मंडल और टाटा मोटर्स प्रबंधन के बड़े अफसरों और यूनियन के नेताओं के षड्यंत्रों के तहत निर्दोषों को फँसाया जा रहा है।
● अप्पु तिवारी, आजसू जिला प्रवक्ता :-
बहन नीतू ने अपने साथ हुए ज्यादती और मारपीट की सूचना देकर सहयोग मांगा। उनके बार बार आग्रह पर मैं मौके स्थल पर पहुंचा। देखा कि उनके साथ पुलिस की मौजूदगी में दुर्व्यवहार हो रही है। फ़िर थोड़ी ही देर में नीतू सिंह, किन्नरों के साथ टाटा मोटर्स के सुरक्षा अफसरों और गुंडा पार्टी ने लज्जा भंग करने की मंशा से दुर्व्यवहार और मारपीट किया। वहाँ किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं रहा। बल्कि नीतू सिंह को बचाने के क्रम में मेरे संग ही टाटा मोटर्स के कई बड़े अफसरों ने मारपीट कर रुपये छिनतई किये जिसपर आजतक प्राथमिकी दर्ज़ नहीं हुई। नीतू के समर्थन में आने की वजह से षड्यंत्र के तहत मुझे गलत आरोपों में फँसाया गया है। मैनें केवल अभियुक्त कंपनी अफसरों का अहंकार तोड़ा है क़ानून नहीं।
● नीतू सिंह, पीड़िता और बाईसिक्स कर्मी आलोक रंजन की विधवा :- टेल्को थाना प्रभारी और अन्य अफ़सर टाटा मोटर्स मैनजमेंट के इशारों पर झूठा केस किये हैं ताकि परसुडीह थाना कांड संख्या 74/2020 के अभियुक्तों को बचाया जा सके। थाना अभियुक्तों को बचा रही है और निर्दोषों पर ज़ुल्म हो रही है। मेरी शिकायत पर आजतक दोषियों को नोटिस नहीं हुआ। परसुडीह और टेल्को थाना की कार्यसंस्कृति से परेशान होकर मैं अनशन पर बैठने के लिए बाध्य हुई। अनशन की लिखित सूचना जिला प्रशासन को दी गई थी जिसपर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई। पुलिस के सामने मेरे संग अभद्रतापूर्ण व्यवहार और मारपीट हुआ। टेल्को पुलिस मूकदर्शक बनी रही। मैनें मदद के लिए आजसू नेता अप्पु तिवारी जी को बुलाया।
● अंकित आनंद, जिला प्रवक्ता, भाजपा :-
टेल्को थाना प्रभारी अखिलेश मंडल और टाटा मोटर्स के चंद अफ़सर षड्यंत्र पूर्वक पुरानी रंजिश निकाल रहे हैं। टेल्को थाना प्रभारी पर लापरवाही और कर्तव्यहीनता के कई मामलों में जाँच चल रही है, इसलिए मुझपर बदले की कार्रवाई की जा रही है। ना तो मैं नीतू सिंह से कभी मिला हूँ और ना ही इस प्रकरण में मेरी कोई भूमिका है। एक विधवा के संग हो रही ज्यादती पर मेरी सहानुभूति नीतू सिंह के साथ है, उन्हें न्याय मिलनी चाहिए। टाटा मोटर्स सुरक्षा कर्मियों द्वारा नीतू सिंह, किन्नरों और अप्पु तिवारी और के साथ किये गए अभद्रता और मारपीट का मैं प्रत्यक्षदर्शी और गवाह हूँ। हमलावरों को नाम और चेहरे से पहचानता हूँ। साजिशन मुझे फँसाया जा रहा है। सीसीटीवी फूटेज़ और मीडिया क्लिपिंग से सच्चाई सामने आ जायेगी। मौके स्थल पर मजिस्ट्रेट और थाना प्रभारी यदि सख्ती दिखातें तो बवाल टल सकता था। पूरा विवाद षड्यंत्र पर आधारित मालूम होता है। निर्दोष हूँ इसलिए गिरफ्तारी देने से भी पीछे नहीं हटूँगा। पत्र लिखकर डीजीपी, डीआईजी, एसएसपी और सिटी एसपी को भी मामले से अवगत करा दिया गया है।
● हर्षवर्धन सिंह, टेल्को यूनियन मज़दूर नेता :- विधवा नीतू सिंह, उनके छोटे बच्चों को न्याय मिलनी चाहिए और दोषियों को सज़ा। टाटा मोटर्स मैनजमेंट के कुछ अफ़सर और टेल्को पुलिस पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर बदले की कार्रवाई कर रही है। मैं किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं रहा। मुझपर दर्ज़ एफआईआर झूठा और तथ्यहीन है। मेरे प्रयासों और याचिका के आलोक में उच्च न्यायालय ने यूनियन चुनाव कराने का निर्देश दिया था। इससे घबराकर यूनियन महामंत्री आरके सिंह और मैनेजमेंट के लोग शाजिश के तहत मुझे फँसा रहे हैं ताकि मज़दूरों के हक़ अधिकार की बातें करने वाले ज़ुबान को बंद किया जा सके।

