सरायकेला-खरसावाँ: जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की प्रथम बैठक मंगलवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त की अध्यक्षता में संपन्न हुई । झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत आयोजित इस बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि और छात्र सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर कड़े निर्णय लिए गए । बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और अभिभावक प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
फीस वृद्धि की सीमा तय, मनमानी वसूली पर लगेगी रोक
उपायुक्त ने निजी स्कूलों द्वारा की जाने वाली फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं:
अधिकतम 10% वृद्धि: मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय विद्यालय स्तरीय समिति की अनुशंसा पर अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क बढ़ा सकेंगे ।
दो वर्षों का अंतराल: एक बार की गई शुल्क वृद्धि न्यूनतम दो वर्षों तक प्रभावी रहेगी, उससे पहले दोबारा वृद्धि पर प्रतिबंध रहेगा ।
अतिरिक्त वृद्धि के लिए अनुमति: 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी ।
डेटा प्रस्तुतिकरण: विद्यालयों को पिछले तीन सत्रों और वर्तमान सत्र (2026-27) की कक्षावार शुल्क विवरणी जिला समिति को देनी होगी ।
अभिभावकों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता
प्रशासन ने अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
अवैध शुल्क पर पाबंदी: प्रवेश या पुनः नामांकन के नाम पर किसी भी प्रकार के अवैध शुल्क की वसूली नहीं की जाएगी ।
सामग्री की बाध्यता खत्म: विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से ही पुस्तक, कॉपी या ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे ।
समिति का गठन: सभी विद्यालयों में ‘अभिभावक-शिक्षक संघ’ (PTA) और शुल्क समिति का गठन अनिवार्य है, जिसकी जानकारी वेबसाइट पर होनी चाहिए ।
छात्र सुरक्षा और परिवहन पर सख्ती
छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उपायुक्त ने परिवहन व्यवस्था पर सख्त निर्देश दिए:
निर्धारित सीट क्षमता: विद्यालय वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा ।
वाहनों की निगरानी: स्कूलों को बाहरी वाहनों की नियमित निगरानी रखने और परिवहन मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है ।
निगरानी और कार्रवाई के निर्देश
उपायुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी निजी स्कूलों के शुल्क का विस्तृत ब्रेकअप (Break-up) प्राप्त करें । साथ ही, राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने की बात कही । उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।



