रांची।
बढ़ती उम्र और सामाजिक बंधनों के कारण अक्सर गांव की लड़कियों का खेल के मैदान तक पहुंचने का सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन, रांची जिले के सुदूर प्रखंड तमाड़ स्थित चिरूडीह गांव की 22 वर्षीय नमिता कुमारी ने इन तमाम रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। अपनी शादी से ठीक पहले नमिता ने न सिर्फ क्रिकेट के मैदान पर पदार्पण किया, बल्कि गांव की दर्जनों अन्य लड़कियों के लिए भी खेल के मैदान तक पहुंचने का एक नया और साहसिक रास्ता खोल दिया है।
रूढ़ियों को तोड़ मैदान पर उतरीं बेटियां
नमिता के इस साहसिक फैसले ने गांव की अन्य लड़कियों में भी गजब का हौसला भर दिया। जो लड़कियां झिझक के कारण कभी मैदान तक नहीं जा पाती थीं, वे अब बेहिचक होकर लड़कों के साथ ‘मिक्स जेंडर क्रिकेट’ खेल रही हैं। रविवार को चिरूडीह गांव में तीन मिक्स जेंडर टीमों—नमिता एकादश, सीता एकादश और काजल एकादश—के बीच एक रोमांचक त्रिकोणीय टूर्नामेंट खेला गया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य समाज में बालक-बालिका समानता को बढ़ावा देना है, जिसमें एक ही टीम में 6 लड़कियां और 5 लड़के एक साथ खेलते हैं।
फाइनल मुकाबले में काजल एकादश बनी चैंपियन
इस त्रिकोणीय टूर्नामेंट में लीग, क्वालीफायर और फाइनल मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। सीता एकादश ने लीग के दोनों मैच जीतकर सीधे फाइनल में प्रवेश किया, जबकि एलिमिनेटर मैच नमिता एकादश और काजल एकादश के बीच हुआ। फाइनल मुकाबला काजल एकादश और सीता एकादश के बीच खेला गया। काजल एकादश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 62/2 का शानदार स्कोर खड़ा किया। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सीता एकादश की टीम निर्धारित ओवरों में केवल 47/5 का स्कोर ही बना सकी। इस तरह काजल एकादश ने 15 रनों से यह ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया।
‘पैडमैन’ तरुण कुमार की प्रेरणा और सचिन तेंदुलकर की सराहना
गांव में इस खेल क्रांति के पीछे सामाजिक संस्था ‘निश्चय फाउंडेशन’ के संस्थापक और ‘झारखंड के पैडमैन’ के नाम से मशहूर तरुण कुमार की अहम भूमिका रही। कुछ दिनों पहले गांव में माहवारी स्वच्छता कार्यशाला के दौरान नमिता ने तरुण कुमार से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई थी। गौरतलब है कि तरुण कुमार ने 2018 में जेंडर समानता के उद्देश्य से इस मिक्स जेंडर क्रिकेट अभियान की शुरुआत की थी, जिसे 2019 में क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर की भी सराहना मिल चुकी है।
शादी के बाद भी जारी रहेगा खेल का सफर
सुबह 7 बजे से लेकर कड़ी धूप में 11:30 बजे तक चले इस टूर्नामेंट में लड़कियों का उत्साह देखने लायक था। इस आयोजन को सफल बनाने में मनीष महतो, आकाश महतो, सोमाय लोहार समेत कई युवाओं का योगदान रहा। खूंटी के उलिहातु निवासी मंगल मुंडा के साथ परिणय सूत्र में बंधने जा रही नमिता ने स्पष्ट किया है कि शादी के बाद भी उनका यह खेल जारी रहेगा। फिलहाल उन्होंने अपनी टीम की कमान साथी खिलाड़ी लक्ष्मी को सौंप दी है। नमिता की यह कहानी समाज की उन लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी और सामाजिक बंधनों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी नई तकदीर लिखना चाहती हैं।




