जमशेदपुर: अक्सर समाज में यह माना जाता है कि खेलकूद में ज्यादा समय देने से बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ता है, लेकिन लौहनगरी जमशेदपुर के एक होनहार छात्र ने इस मिथक को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। शहर के प्रतिष्ठित राजेंद्र विद्यालय के मेधावी विद्यार्थी अनमोल सिंह ने 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 94 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। अनमोल ने अपनी इस असाधारण सफलता से यह साबित कर दिया है कि अगर मन में सच्ची लगन और सही ‘टाइम मैनेजमेंट’ हो, तो खेल कभी भी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता।
जेआरडी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बहाते हैं पसीना
अनमोल सिंह सिर्फ किताबी ज्ञान में ही अव्वल नहीं हैं, बल्कि वे क्रिकेट की पिच पर भी एक उभरते हुए होनहार खिलाड़ी के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। अनमोल वर्तमान में शहर के प्रतिष्ठित जेआरडी (JRD) स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एक जूनियर क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में नियमित रूप से कड़ा अभ्यास करते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य झारखंड की राज्य (स्टेट) क्रिकेट टीम में अपनी जगह पक्की करना है और इसके लिए वे मैदान पर निरंतर संघर्षशील हैं। क्रिकेट जैसे अत्यधिक शारीरिक मेहनत और भारी समर्पण की मांग करने वाले खेल के साथ-साथ किताबों पर ध्यान केंद्रित करना किसी भी युवा छात्र के लिए एक बेहद कठिन चुनौती होती है।
स्वस्थ मस्तिष्क में ही स्वस्थ शिक्षा का निवास
ग्राउंड पर घंटों पसीना बहाने और शारीरिक थकान के बाद पढ़ाई के लिए एकाग्रता और ऊर्जा निकालना बिल्कुल भी आसान नहीं होता है। मगर अनमोल सिंह ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से खेल तथा पढ़ाई, दोनों मोर्चों पर बेहतरीन प्रदर्शन कर यह पुरानी कहावत सच कर दिखाई है कि ‘स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क में ही स्वस्थ शिक्षा का निवास होता है’। उन्होंने अपनी दिनचर्या को इतनी कुशलता से संतुलित किया कि न तो उनके नेट प्रैक्टिस के शेड्यूल में कोई कमी आई और न ही उनकी 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारियों पर कोई असर पड़ा।
परिवार में जश्न का माहौल, अमेरिका से आए चाचा गौरवान्वित
अनमोल के इस शानदार और प्रेरणादायक परीक्षा परिणाम के सामने आने के बाद उनके पूरे परिवार में जश्न और अपार खुशी का माहौल है। इस खुशी को दोगुना करने वाली बात यह रही कि अनमोल के चाचा अविनाश सिंह, जो पिछले 10 वर्षों से अमेरिका (USA) में रह रहे हैं, संयोगवश ठीक रिजल्ट के समय ही भारत आए हुए हैं। अपने भतीजे की इस दोहरी और शानदार उपलब्धि को देखकर वे भी बेहद प्रसन्न और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। पूरे परिवार और शुभचिंतकों को यह पूरी उम्मीद है कि अनमोल आने वाले समय में अपने चाचा के ही सफल पदचिन्हों पर चलते हुए न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे देश का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करेगा।
शहर के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
आज के दौर में जहां एक तरफ युवा अपना ज्यादातर समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बर्बाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अनमोल सिंह की यह सफलता शहर के हजारों स्कूली छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि सही मार्गदर्शन और अनुशासन के साथ खेल के मैदान और परीक्षा हॉल, दोनों जगह सफलता का परचम लहराया जा सकता है।



