
★अब हाथी-मानव संघर्ष को कम करने और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
★मोनिटरिंग के पहले दिन किता, सरजमडीह, रामडेरा, बुड़ाम क्षेत्र में हुआ सर्वे
*★सिल्ली के झाबरी में मिला 21 हाथी के गांव पार होने के प्रमाण


सिल्ली
तीन साल तक चलनेवाले हाथी निगरानी का काम कालामाटी- महिलांग कॉरिडोर में शुरू हुआ। यह कार्य राज्य में पहली बार किया जा रहा है ताकि हाथी मानव संघर्ष को कम और ग्रामीणों को जागरूक किया जा सके। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ झारखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में कॉरिडोर निगरानी का काम हो रहा है। मालूम हो कि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग भारत सरकार ने देश भर में 101 हाथी कॉरिडोर को चिन्हित किया है, जिसमें सात कॉरिडोर झारखण्ड में हैं। इससे पूर्व पश्चिमी सिंहभूम स्थित तीन कॉरिडोर में एक वर्ष के निगरानी का काम वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ झारखण्ड सफलता पूर्वक पूरा कर चुकी है।
पश्चिमी सिंहभूम के बाद रांची जिला के सोनाहातू और सिल्ली प्रखंड स्थित कालामाटी- महिलांग कॉरिडोर में इन प्रखंड के दर्जनों गांव को सम्मिलित किया गया है। इन गांव में आये दिन हाथियों के आवागमन से ग्रामीणों के फसलों, घरों और जान को नुकसान हो रहा है। संस्था के कोषाध्यक्ष त्रि विक्रमनाथ शाहदेव और कार्यक्रम संयोजक अखिलेश शर्मा ने बताया कि सिल्ली प्रखंड में मोनिटरिंग के दौरान झाबरी गांव से 21 हाथियों के पार होने के प्रमाण मिले हैं। इस कॉर्टिडोर को 56 ग्रिड में विभक्त किया गया है। पूरे 56 किलोमीटर की दूरी टीम वर्ष में चार बार पूरा करेगी और हाथियों के आवागमन, हाथी मानव संघर्ष के सबूत जुटाएगी। कॉर्टिडोर का कुछ हिस्सा पश्चिम बंगाल तक जाता है वहां भी निगरानी का कार्य होगा। ग्रामीणों के बीच नुक्कड़ नाटक, मीडिया वर्कशॉप, गांव का समाजिक आर्थिक सर्वेक्षण समेत अन्य कार्य होंगे। इन कार्यों को सफलतापूर्वक करने में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वन विभाग ने पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है। कार्य को लेकर एक वर्ष पूर्व ही हेड ऑफ फॉरेस्ट डॉ संजय कुमार को जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। इस पूरे ग्रिड के लिए बरेंदा के तापस कर्मकार को संस्था द्वारा वाइल्ड एनिमल ट्रैकर के तौर पर नियुक्त किया गया है।
ये होंगे कार्य- स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, हाथी आवागमन के रिकॉर्ड, हाथी-मानव संघर्ष पर नुक्कड़ नाटक, ग्रामीणों के बीच टॉर्च का वितरण, हाथियों को फसलों तक नहीं पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिक पद्धतियों से ग्रामीणों को अवगत कराना, स्थानीय युवाओं के साथ हाथी भगाओ दल का गठन समेत अन्य कार्य होंगे।
वर्जन
हमारा उद्देश्य हाथी मानव संघर्ष को कम करना है। ताकि हाथियों का अस्तित्व बचा रहे और ग्रामीणों के फसलों, घरों एवं किसी की जान न जाए। हाथी मानव के बीच भावनात्मक संबंध बनाना कार्य का उद्देश्य है। हाथी को उनका सदियों पुराना रास्ता बिना किसी बाधा के मिले, यह ग्रामीणों को समझाना है।
उपासना गांगुली, ऑफिस इंचार्ज, हाथी कॉर्टिडोर प्रोजेक्ट

