
नोआमुंडी,। जब शब्द संवाद का माध्यम नहीं बन पाते, तब हाथों के संकेत संचार की भाषा बनते हैं। इसी संदेश के साथ टाटा स्टील फाउंडेशन के ‘सबल’ कार्यक्रम की ओर से अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर नोआमुंडी में विशेष सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ बधिर संस्कृति को समझने, बधिर व्यक्तियों के अधिकार एवं गरिमा का सम्मान करने और समान अवसरों के प्रति सामाजिक समझ विकसित करना रहा।
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172 लोगों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में कुल 172 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें बधिर बच्चे, उनके अभिभावक, शिक्षक, विद्यार्थी, समुदाय के सदस्य, जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोग तथा नोआमुंडी और जोड़ा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक शामिल रहे।
यह आयोजन ‘सबल’ की ओर से अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे माहव्यापी जागरूकता अभियान का हिस्सा था।
अभियान के तहत नोआमुंडी, जगन्नाथपुर और जोड़ा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता एवं सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। आयोजकों के अनुसार, इन गतिविधियों के माध्यम से लगभग 1,138 लोगों तक पहुंच बनाई गई।
बधिर विद्यार्थियों ने सिखाई भारतीय सांकेतिक भाषा
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बधिर विद्यार्थियों द्वारा संचालित भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) सीखने का सत्र रहा। इसमें प्रतिभागियों ने बुनियादी अभिवादन, वर्णमाला और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न संकेत सीखे।
इसके अलावा भारतीय सांकेतिक भाषा में विशेष क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बधिर विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रोजेक्ट गर्ल्स स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति के जरिए विविधता, समानता और समावेशन का संदेश दिया।
नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक चुनौतियों को किया प्रस्तुत
कार्यक्रम में इंटर कॉलेज, नोआमुंडी के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से बधिर व्यक्तियों, उनके परिवारों और समुदायों के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों को सामने रखा गया।
प्रस्तुति के जरिए यह संदेश दिया गया कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता, प्रतिभा और संभावनाओं से होनी चाहिए।
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‘सांकेतिक भाषा सीखना महत्वपूर्ण अनुभव’
कार्यक्रम के समापन पर बधिर विद्यार्थियों द्वारा केक काटने का आयोजन भी किया गया।
इस अवसर पर प्रेरणा समिति की प्रतिनिधि अभिश्वेता त्रिपाठी ने कहा कि बधिर संस्कृति और सांकेतिक भाषा के बारे में जानना उनके लिए महत्वपूर्ण सीखने का अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इससे समुदाय में बधिर व्यक्तियों के साथ अधिक आत्मविश्वास और सार्थक तरीके से संवाद करने की प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में प्रेरणा समिति के प्रतिनिधियों, नोआमुंडी कॉलेज के डॉ. मनोजित बिस्वास, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, बधिर विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों सहित विभिन्न हितधारकों और गणमान्य लोगों की सहभागिता रही।
‘सबल’ के इस आयोजन ने सांकेतिक भाषा को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ने का संदेश दिया।


