
संतोष वर्मा


चाईबासा।एक ओर सरकार लौहआयस्क उत्खन्न पर रोक लगा रखी है,तो दुसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम जिलें के झीकपानी प्रखंड क्षेत्र के नयागांव में पिछले 15 सालों से साई स्पंज फैक्टरी अवैध रूप से चल रही है वहीं माइनिंग एक्ट के नियमों की धज्जिंया उड़ रही है।लेकिन विभाग गहरी निंद्रा में सो रही है और सरकार को लाखों रूपये का राज्स्व का चुना लग रहा है।साथ क्षेत्र के ग्रामीण प्रदुषण से ग्रस्त हो रहें है, लेकिन प्रदुषण विभाग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहीं है।जबकी सरकार का नियम है कि स्पंज आयरन फैक्टरी उसी को दिया जाता है जिस कंपनी के पास अपना स्टील प्लांट हो लेकिन साई स्पंज फैक्टरी का आज तक अपना स्टील कंपनी नहीं है।ज्ञात हो जिला के झींकपानी प्रखंड के करीब एक दर्जन गांव के लोग प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर हैं। झींकपानी प्रखंड के नवागांव में साई स्पंज फैक्टरी से निकलने वाले काले धुएं से आम लोग ही परेशान नहीं है, बल्कि इस प्रदूषण से पर्यावरण पर बुरा असर पड रहा है. हर तरफ काले धूल जम गए हैं. इतना ही नहीं फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषित पानी को भी खुलेआम बहा दिया जा रहा है. जिससे आस-पास के खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। इस मामले में आदिवासी संगठनों ने राष्टपती,प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रदूषण बोर्ड को कई बार पत्राचार किया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश व्याप्त है
न्याय के लिए ग्रामीणों ने इनसे भी लगाई पत्राचार के द्वारा गुहार
महामहिम राष्ट्रपति महोदय , भारत सरकार , नई दिल्ली, प्रधानमंत्री , भारत सरकार नई दिल्ली, राज्यपाल महोदय , झारखण्ड सरकार रॉची, मुख्यमंत्री झारखण्ड सरकार
यह भी जानें
साई स्पंज कारखाना नवागॉव झींकपानी जिल – प सिंहभूम , झारखण्ड में प्रदूषण से ग्रामीण जीवन अस्त – व्यस्त होने के सबंध
में ग्रामीणों का कहना है कि १ ) हमारा गाँव आदिवासी बहुत क्षेत्र है जहाँ सभी लोग कृषि पर अपना जीवन यापन का गुजारा करते हैं । हमारे गाँव के बीचों – बीच स्पंज कारखाना वर्ष 2003 को गलत तरीके से बैठाया गया था । जिसका काफी विरोध हुआ था और गाँव से बाहर बैठाना चाहिए था । ( 3 ) स्थानीय बेरोजगारों ने कम्पनी प्रबंधन द्वारा रोजगार दिलाने एवं विकास की आश्वाशन देने के बाद ही कम्पनी को स्थापित किया गया । ( 4 ) कम्पनी स्थापित होने के 15 वर्ष बाद भी कोई विकास नहीं दिख रहा है और जो नजदूर काम कर रहे हैं उनका शेषण जुल्म हो रहा है । ( 5 ) कम्पनी में लगभग 300 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं जबकि कम्पनी अपने लाईसेन्स में 150 से कम मजदूरों को रजिस्ट्रेशन कराया है । जो मजदूरों के साथ भविष्य में किसी भी प्रकार का दुर्घटना होने तथा भविष्य निधि आदि लाभ से वंचित हो जाएगें । ( 6 ) स्थानीय मजदूर जब अपने हक की बात करते है तो उन्हे काम से बैठा दिया जाता है । उदाहरण में लोड अनलोड के 15 मजदूर है । कैन्टीन , चिकित्सा आदि की सुविधा नहीं दी जाती है । ( 7 ) कम्पनी प्रबंधन ने गाँव के सामाजिक विकास के लिए प्रत्येक साल 1 लाख नावागाँव एवं 50 हजार लोकेसाई को देने का समझौता हुआ था जो पिछले 8-10 सालों से गाँव के लोगों को नहीं दे रहा है । प्रदूषण को लेकर कम्पनी की लापरवाही ( 1 ) प्रदूषण के मामले में कम्पनी प्रबंधन 15 वर्षों बाद भी अपना पावर प्लॉट नहीं बैठाया जबकि कम्पनी स्पंज कम्पनी को स्थापित करने के लिए सबसे पहला यही शर्त होता है कि वो अपना पावर प्लॉट स्थापित कर उससे निकलने वाला चार – कोल को इस्तेमाल कर एवं स्वयं प्रबन्धन काला ईंटा का निर्माण कर उसे खपत करना होता है । लेकिन इतने वर्षों बाद भी सदस्य सचिव झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पार्षद राँची किस रूप में इस कारखाना को चलाने में स्वीकृति प्रदान किये हुए है यह समझ से परे है । कम्पनी प्रबंधन झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पार्षद रॉची के शर्तों का अनुपालन नहीं करने के वजह से कम्पनी से निकलने वाले वेस्ट मेटेरियल ( डस्ट एवं चारकोल ) को विभिन्न गाँव में गिराये हुये देखा जा सकता है ।-2 जो कानूनन बिल्कुल गलत है । इसके अलावा कम्पनी प्रबंधन चिमनी से निकलने वाले विषैले धुओं का रोक थाम के लिए ESP का नियमित रूप से मरम्मति , साफ सफाई एवं ईस्तेमाल करना है लेकिन प्रबंधन ESP को हाथी दाँत की तरह लगाए बैठे हैं । जिसका नतीजा है आज पूरा गाँव काला धूआ से प्रभावित है जिसके कारण कृषि और स्वस्थ्य पर बहुत बरा असर हो रहा है साथ ही साथ खेत बंजर हो रहे हैं । ( 2 ) कम्पनी प्रबंधन Rainwater Harvesting के नाम पर विभाग को ठगने का काम किया है । Rain Water Harvesting का निर्माण में भारी अनियमितता है जिसके कारण से जो पानी शुद्ध कर भूगर्भ में जाने देना है वह पूरी तरह से प्रदूषित और रासायनिक पानी जा रहा है जिसके कारण से ग्रामीण प्रदूषित पानी पीने को गजबूर हैं । बालु को गहीना में बदला जाना है जिसे कभी नहीं बदला गया है जिसकी वजह से लाल मिटटी उपरी सतह में भरा हुआ है । ( 3 ) कम्पनी प्रबंधन ने कम्पनी अन्दर लगभग 5 डीप बोरिंग निर्माण किया है । जिससे गाँव का जल स्तर बहुत नीचे चला गया है और ना ही ग्रामीणों को पीने का पानी दे रहा है । महामहिम , ऐसे में हम सभी ग्रामीण आपसे माँग करते है कि कम्पनी प्रबंधन ने हम ग्रामीणों को घोखा दिया है । हम सभी आपसे मांग करते है कि इन सभी बिन्दुओं पर रिटार्यड जज का जॉच कमेटी बनाकर सरकार और ग्रामीणों को धोखा देने, प्रदूषण फैलाने को लेकर कानूनी कारवाई करने की गुहार लगा रही है।

