
गुरुग्राम/रांची। निसान मोटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एनएमआईपीएल) ने आज ऑल-न्यू Nissan Gravite के लिए सरकार द्वारा प्रमाणित सीएनजी रेट्रोफिटमेंट किट लॉन्च करने का एलान किया। कंपनी ने सेगमेंट में पहली बार स्मार्ट ट्विन-सिलेंडर तकनीक पेश की है, जिसमें 25-25 लीटर के दो सिलेंडर लगाए गए हैं। इस तकनीक से 7-सीटर स्पेस, कम्फर्ट और उपयोगिता को बरकरार रखते हुए ग्राहकों को सीएनजी विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा।

कंपनी के अनुसार, सीएनजी किट की शुरुआती कीमत 82,999 रुपये रखी गई है। यह किट 16 राज्यों के 60 शहरों में निसान के अधिकृत डीलर नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध होगी। ग्राहक अधिकृत डीलरशिप से किट इंस्टॉलेशन के लिए ऑर्डर कर सकेंगे।
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मोटोजेन ने किया डेवलप, मिलेगी 3 साल की वारंटी
कंपनी ने बताया कि सीएनजी किट को मोटोजेन द्वारा विकसित और क्वालिटी एश्योर्ड किया गया है। किट कंपोनेंट्स पर 3 वर्ष अथवा 1 लाख किलोमीटर तक की थर्ड पार्टी वारंटी भी दी जा रही है।
7-सीटर स्पेस और कम खर्च पर फोकस
निसान एंड इन्फिनिटी के डिविजनल वाइस प्रेसिडेंट एवं मिडिल ईस्ट, केएसए, सीआईएस व भारत के प्रेसिडेंट थियरी सबाग ने कहा कि भारत निसान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है और कंपनी ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप किफायती एवं भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रेवाइट सीएनजी परिवारों को कम लागत में ज्यादा स्पेस और बेहतर उपयोगिता प्रदान करेगी।
मैग्नाइट सीएनजी के बाद नया कदम
निसान मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक सौरभ वत्स ने कहा कि मैग्नाइट सीएनजी को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब ग्रेवाइट के लिए ट्विन-सिलेंडर समाधान पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम 7-सीटर की पूरी फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखते हुए ग्राहकों को बेहतर माइलेज और कम परिचालन लागत देगा।
सुरक्षा और परफॉर्मेंस पर विशेष फोकस
कंपनी के अनुसार, बीएस-6.2 मानकों के अनुरूप यह सीएनजी सिस्टम आईसीएटी प्रमाणित है। इसमें सुरक्षा के लिए 8.1 एमएम मोटाई वाले हेवी-ड्यूटी सिलेंडर लगाए गए हैं। साथ ही पेट्रोल और सीएनजी के बीच आसान स्विचओवर की सुविधा भी दी गई है।
हाई-माइलेज यूजर्स के लिए किफायती विकल्प
कंपनी का दावा है कि ऑल-न्यू ग्रेवाइट सीएनजी ऑफिस और स्कूल आने-जाने वाले परिवारों तथा नियमित रूप से लंबी दूरी तय करने वाले हाई-माइलेज यूजर्स के लिए किफायती विकल्प साबित होगी। इससे ईंधन खर्च कम होगा और पर्यावरण के अनुकूल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।



