
जमशेदपुर: उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर शनिवार (25 जुलाई) को शहर में एक भव्य नाट्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ और रोटरी क्लब (पश्चिमी जमशेदपुर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के 15 प्रतिष्ठित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रेमचंद की कालजयी कहानियों को मंच पर जीवंत कर दिया।


इस प्रतियोगिता में के.पी.एस. गम्हरिया के विद्यार्थियों ने अपने शानदार अभिनय का लोहा मनवाते हुए प्रथम पुरस्कार (ओवरऑल चैंपियन) अपने नाम किया।
कार्यक्रम का शानदार आगाज
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. भारती कुमारी ने अपनी मधुर आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. संध्या सिन्हा ने उपस्थित अतिथियों और साहित्यशास्त्रियों का स्वागत करते हुए स्वागत भाषण दिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रेमचंद के साहित्य, उनके मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना से जोड़ना था।
प्रेमचंद की इन कालजयी कृतियों का हुआ मंचन
प्रतियोगिता के दौरान नन्हें कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमता, दलित शोषण और पारिवारिक मूल्यों को बखूबी दर्शाया।
के.पी.एस. गम्हरिया: ‘दूध का दाम’ (सामाजिक विषमता)
के.पी.एस. कदमा व जुस्को स्कूल (कदमा): ‘ईदगाह’ (बाल मनोविज्ञान)
डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल (बिष्टुपुर): ‘निर्मला’ (नारी जीवन की व्यथा)
आर.एम.एस. हाई स्कूल (बालीचेला): ‘सवा सेर गेहूं’
काशीडीह हाई स्कूल: ‘पंच परमेश्वर’
के.पी.एस. मानगो: ‘कफ़न’
गुलमोहर हाई स्कूल: ‘बड़े भाई साहब’
डी.बी.एम.एस. कदमा: ‘ठाकुर का कुआं’
बारीडीह हाई स्कूल: ‘सद्गति’
मोतीलाल पब्लिक स्कूल: ‘नमक का दारोगा’
लोयोला स्कूल (टेल्को): ‘बूढ़ी काकी’
वैली व्यू स्कूल: ‘मंत्र’
विकास विद्यालय (मानगो): ‘बड़े घर की बेटी’
डी.वी.एम.एस. (बी.एच. एरिया): ‘माँ’
“सौ वर्षों बाद भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद”: प्रमोद दुबे
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रोटरी क्लब के असिस्टेंट गवर्नर श्री प्रमोद दुबे, अध्यक्ष गुरप्रीत कौर भाटिया और सचिव ऋषि चंद्रानी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्री प्रमोद दुबे ने कहा, “जिनकी लेखनी सौ वर्षों बाद भी उतनी ही प्रभावी है और जिनकी कहानियाँ आज भी प्रासंगिक हैं, यही प्रेमचंद का असली महात्म्य है। ‘पंच परमेश्वर’ की यह पंक्ति—’बिगाड़ के डर से ईमान छोड़ दोगे क्या’—आज भी हमारे जीवन का मार्गदर्शन करती है।”
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विजेताओं की सूची और पुरस्कार वितरण
प्रतियोगिता की निर्णायक समिति में श्री हरि मित्तल, अरुणा झा और कृष्णा सिन्हा शामिल थे। कार्यक्रम के समापन पर विजेताओं को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया:
प्रथम पुरस्कार: के.पी.एस. गम्हरिया (कहानी: ‘दूध का दाम’)
द्वितीय पुरस्कार: के.पी.एस. कदमा (कहानी: ‘ईदगाह’)
तृतीय पुरस्कार: डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, बिष्टुपुर (कहानी: ‘निर्मला’)
श्रेष्ठ निर्देशक: विभा विकास
सर्वश्रेष्ठ अभिनय: ‘दूध का दाम’ में ‘भंगी’ का पात्र निभाने वाली बाल कलाकार को।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अनिता शर्मा ने किया और रोटरी अध्यक्ष गुरप्रीत कौर भाटिया के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन का समापन हुआ।



