
जमशेदपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में “एनआईआरएफ/क्यूएस क्रम निर्धारण एवं एनआईटी जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा” विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एनआईटी जमशेदपुर की राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना था। कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने भाग लिया और संस्थान की रैंकिंग सुधारने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।

अनुसंधान और परामर्श पर ध्यान देने का आह्वान
कार्यक्रम की शुरुआत अनुसंधान एवं परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया। प्रो. कुमार ने संस्थान के सभी संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों से आह्वान किया कि वे गुणवत्तापूर्ण शोध, वित्तपोषित परियोजनाओं (Funded Projects), बौद्धिक संपदा (IPR), परामर्श कार्यों (Consultancy) और आँकड़ा-आधारित योजना (Data-Driven Planning) पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार से ही संस्थान की राष्ट्रीय और वैश्विक रैंकिंग में सकारात्मक बदलाव संभव है।
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने गिनाईं संस्थान की खूबियां
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान की अब तक की शानदार उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनआईटी जमशेदपुर के पास एक बेहद मजबूत शैक्षणिक आधार, अनुभवी व योग्य संकाय सदस्य, प्रतिभाशाली विद्यार्थी और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जो इसे अन्य संस्थानों से अलग बनाती हैं।
प्रो. सूत्रधार ने बहुविषयी शोध (Multidisciplinary Research), अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार परिवेश (Innovation Ecosystem) और उद्योग-सम्बद्ध परियोजनाओं को संस्थान की वैश्विक उत्कृष्टता यात्रा के प्रमुख आधार स्तंभ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दिशाओं में निरंतर प्रयास करने से एनआईटी जमशेदपुर वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बनाने में सफल होगा।
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विशेषज्ञों ने रैंकिंग सुधारने और सतत विकास पर दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए:
प्रो. सुनील कुमार (सीएसआईआर-नीरी, नागपुर): उन्होंने शोध की गुणवत्ता, सतत विकास (Sustainable Development), पर्यावरणीय शोध और वर्तमान समय में बहुविषयी कार्यों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. कुमारस्वामी: उन्होंने वैश्विक क्रम निर्धारण रणनीति (Global Ranking Strategy), संस्थागत तुलनात्मक मूल्यांकन, शैक्षणिक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
डॉ. कार्तिक श्रीधर (उपाध्यक्ष, आईकेयर): उन्होंने संस्थागत क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीयकरण (Internationalization) और उच्च शिक्षा नेतृत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए रैंकिंग में सुधार के तरीके बताए।
श्री दयानिधि उर्मलिया: उन्होंने ग्रामीण विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System), सामाजिक विस्तार और सामाजिक प्रभाव को संस्थागत मूल्यांकन से जोड़ने पर विशेष प्रकाश डाला।
सामूहिक संस्थागत प्रयासों से ही मिलेगी वैश्विक पहचान
कार्यशाला में उपस्थित सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में विभागीय स्तर पर लक्ष्य निर्धारण, शोध उपलब्धियों के व्यवस्थित अभिलेखन (Documentation) और सामूहिक संस्थागत प्रयासों पर बल दिया।
समापन अवसर पर निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सभी विषय विशेषज्ञों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस कार्यशाला के दौरान प्राप्त सभी बहुमूल्य सुझावों को संस्थान की भविष्य की रणनीतियों में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह कार्यशाला एनआईटी जमशेदपुर की शोध, नवाचार, परामर्श, अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।



