
जमशेदपुर: युवाओं को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने के लिए जमशेदपुर में एक बेहद सराहनीय पहल की गई है। जमशेदपुर आत्महत्या निवारण केंद्र ‘जीवन’ के वालंटियर्स ने एनआईटी (NIT) परिसर में आयोजित 10 दिवसीय समर कैंप में एक विशेष सत्र का आयोजन किया। इस कैंप में शामिल लगभग 550 एनसीसी (NCC) कैडेट्स के लिए ‘इमोशनली एम्पावरिंग वनसेल्फ’ विषय पर डेढ़ घंटे का एक शानदार इंटरैक्टिव सत्र चलाया गया। इस खास सत्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें भावनात्मक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करने के लिए प्रेरित करना था।
एक अनोखी गतिविधि से हुई सत्र की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत एक बेहद रोचक और सकारात्मक गतिविधि के साथ हुई। सत्र में मौजूद सभी कैडेट्स को अपने जीवन के सबसे खुशहाल पल को याद करने के लिए कहा गया। इस अनूठी गतिविधि ने कैडेट्स को अपनी भावनाओं से सकारात्मक रूप से जुड़ने में मदद की और पूरे माहौल को ऊर्जावान बना दिया। इसके बाद ‘जीवन’ के वालंटियर्स ने मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत से जुड़े सामाजिक कलंक (Stigma) को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने युवाओं को समझाया कि हमारा भावनात्मक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है।
तनाव के लक्षणों को पहचानना है जरूरी
सत्र के दौरान कैडेट्स को दैनिक जीवन में आने वाले विभिन्न तनावों और डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों के बारे में जागरूक किया गया। संस्था के वक्ताओं ने भावनात्मक संकट के शारीरिक और मानसिक संकेतों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब भी मानसिक रूप से परेशानी महसूस हो, तो समय पर सहायता लेने में बिल्कुल संकोच नहीं करना चाहिए।
युवाओं ने ली मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शपथ
इस कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वालंटियर्स के साथ सक्रिय संवाद किया। सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक बड़ी जिम्मेदारी उठाते हुए शपथ ली। कैडेट्स ने कसम खाई कि वे न सिर्फ अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखेंगे, बल्कि समाज में दूसरों को भी भावनात्मक रूप से सहयोग प्रदान करेंगे।
भावनात्मक रूप से सशक्त बनने के मूल मंत्र
‘जीवन’ संस्था के स्वयंसेवकों ने युवाओं के साथ भावनात्मक रूप से सशक्त बनने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:
आत्म-मंथन: नियमित रूप से स्वयं के साथ समय बिताकर अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए।
सकारात्मक दृष्टिकोण: जीवन की कठिन परिस्थितियों के प्रति हमेशा एक पॉजिटिव एप्रोच विकसित करने का प्रयास करें।
स्वीकार्यता: यह स्वीकार करना बेहद सामान्य है कि कभी-कभी परेशान या उदास महसूस करना भी लाइफ का एक हिस्सा है।
संवाद: मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना और जरूरत पड़ने पर भावनात्मक सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि एक साहसिक कदम है।
मदद के लिए हमेशा तैयार है ‘जीवन’ संस्था
‘जीवन’ के वालंटियर्स भावनात्मक कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर हैं। यदि कोई व्यक्ति आमने-सामने बैठकर बातचीत करना चाहता है, तो वह बिष्टुपुर स्थित ’25 क्यू रोड केंद्र’ में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच संपर्क कर सकता है। इसके अलावा, तत्काल सहायता या काउंसलिंग के लिए संस्था के हेल्पलाइन नंबरों 9297777499 और 9297777500 पर फोन या व्हाट्सऐप के माध्यम से भी चौबीसों घंटे संपर्क किया जा सकता है।


