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Home » JAMSHEDPUR NEWS: डालसा के न्याय सदन में गूंजी बालश्रम के खिलाफ आवाज, कानूनी अधिकारों पर हुई चर्चा
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JAMSHEDPUR NEWS: डालसा के न्याय सदन में गूंजी बालश्रम के खिलाफ आवाज, कानूनी अधिकारों पर हुई चर्चा

BJNN DeskBy BJNN DeskJune 12, 2026No Comments3 Mins Read
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जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA) जमशेदपुर के तत्वाधान में शुक्रवार को न्याय सदन सभागार में ‘विश्व बालश्रम निषेध दिवस’ पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशानुसार और डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विधिक विशेषज्ञों ने बाल श्रम को समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप बताते हुए इससे निपटने के कानूनी उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

क्यों मनाया जाता है विश्व बालश्रम निषेध दिवस?

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ मध्यस्थ अधिवक्ता के के सिन्हा ने बताया कि हर वर्ष 12 जून को पूरे विश्व में बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व विकास के समान अवसर देना है। उन्होंने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा वर्ष 2002 में इस दिवस की शुरुआत की गई थी, जबकि 1999 में ‘Worst Forms of Child Labour Convention (No. 182)’ को अपनाया गया था।

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क्या है बाल श्रम की परिभाषा और भारत की स्थिति?

विशेषज्ञों के अनुसार, बाल श्रम वह कार्य है जिसके कारण बच्चे को स्कूल छोड़ना पड़ता है और जो उसके मानसिक, शारीरिक व सामाजिक विकास को नुकसान पहुंचाता है। ILO के मुताबिक 5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चे जब शिक्षा और स्वास्थ्य को बाधित करने वाले कामों में लगते हैं, तो वह बाल श्रम है। जनगणना 2011 के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि भारत में 5-14 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1.01 करोड़ बाल मजदूर थे, जो अधिकांशतः असंगठित क्षेत्र, कृषि, घरेलू काम और मौरंग-बालू ढुलाई जैसे खतरनाक कार्यों में लगे हैं।

बाल श्रम के खिलाफ कड़े कानून और अधिकार

लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा, सदस्य राजेश श्रीवास्तव और मनोज कुमार सिंह ने बाल श्रम से जुड़े कानूनी पहलुओं को सामने रखा।

बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986: इसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE), 2009: इसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है।

पोक्सो एक्ट (POCSO), 2012: बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह विशेष कानून बनाया गया है।

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जागरूकता से ही थमेगा बालश्रम

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) के तहत पुनर्वास और विशेष विद्यालयों के संचालन की बात कही। लीगल एड डिफेंस कौंसिल के चीफ विदेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि बालश्रम पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। जब तक आम लोग इसके दुष्परिणामों को नहीं समझेंगे, तब तक इसे जड़ से खत्म करना मुश्किल है। इस मौके पर शहर के कई गणमान्य लोग और विधिक कर्मी उपस्थित थे।

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