जमशेदपुर।
आज के दौर में जहां जन्मदिन, शादी की सालगिरह और अन्य खुशियों के मौकों को बड़े-बड़े होटलों में मनाकर रुतबा और दिखावा करने की एक अंधी होड़ मची हुई है, वहीं जमशेदपुर से एक बेहद प्रेरणादायक और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष सुशील अग्रवाल ने समाज को एक नई और संवेदनशील दिशा दिखाते हुए अपने बेटे का जन्मदिन पूरी सादगी के साथ गौशाला में मनाया। उनकी इस अनूठी और निस्वार्थ पहल की पूरे शहर और राज्य में जमकर सराहना हो रही है।
18 हजार गौवंश के बीच मना जश्न, खिलाया गुड़ और हरा चारा
सुशील अग्रवाल ने अपने बेटे के जन्मदिन के इस खास मौके पर किसी महंगे रिसॉर्ट या होटल के बजाय चाकुलिया स्थित ‘ध्यान फाउंडेशन’ द्वारा संचालित विशाल गौशाला का रुख किया। यह कोई आम गौशाला नहीं है, बल्कि यहां लगभग 18,000 बेसहारा और बीमार गौवंश का पालन-पोषण किया जाता है। इस पवित्र अवसर पर उनके परिवार ने गौमाताओं के बीच अपना समय बिताया। उन्होंने पूरे श्रद्धा भाव से गौमाताओं की सेवा की और उन्हें गुड़ तथा हरा चारा खिलाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस तरह के आयोजन से न केवल गौसेवा का महान पुण्य प्राप्त हुआ, बल्कि जीव-जंतुओं के प्रति दया और संवेदनशीलता का एक गहरा सामाजिक संदेश भी गया।
दिखावे की संस्कृति पर करारी चोट, सादगी और सेवा का संदेश
वर्तमान आधुनिक समाज में जहां लाखों रुपये सिर्फ कुछ घंटों की डीजे पार्टी, सजावट और चकाचौंध में खर्च कर दिए जाते हैं, सुशील अग्रवाल का यह कदम इस दिखावे की संस्कृति पर एक करारी चोट है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जीवन की असली खुशी, सुकून और संतुष्टि महंगे आयोजनों में नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा, परोपकार और सादगी में छिपी है। उनकी इस पहल ने समाज के हर वर्ग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपनी खुशियों को बांटने का सबसे बेहतरीन तरीका बेसहारों की सेवा करना है। यह कदम लोगों को वास्तविक मानवता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
कार्यक्रम में शामिल हुए 100 से अधिक लोग, प्रभा पाडिया की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस सादगी भरे लेकिन बेहद खास और पुण्यदायी कार्यक्रम में जमशेदपुर और चाकुलिया से लगभग 100 से अधिक गणमान्य लोग और रिश्तेदार शामिल हुए। इस आयोजन की शोभा तब और बढ़ गई जब प्रदेश मारवाड़ी महिला सम्मेलन की अध्यक्ष प्रभा पाडिया ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। वहां मौजूद सभी अतिथियों ने इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया।
निश्चित रूप से, सुशील अग्रवाल की यह पहल उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो अपनी खुशियों को सिर्फ दिखावे और पैसे के पैमाने पर मापते हैं। समाज को ऐसी ही सकारात्मक सोच की सख्त जरूरत है।



