
जमशेदपुर.

जमशेदपुर की बिगड़ती कानून-व्यवस्था में सुधार और शहर में अमन-चैन कायम करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने जिले के नवनियुक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉक्टर एहतेशाम वकारिब से मुलाकात कर शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े सुझाव सौंपे हैं.
ठंडे बस्ते में पड़ी सर्विलांस योजना को तुरंत एक्टिव करे प्रशासन
जवाहरलाल शर्मा ने SSP का ध्यान शहर की तकनीकी सुरक्षा की ओर खींचते हुए कहा कि पूरे जमशेदपुर को सर्विलांस (CCTV कैमरों की निगरानी) पर रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक बेहतरीन प्रस्ताव तैयार किया गया था. दुर्भाग्य से पिछले तीन-चार वर्षों से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है. उन्होंने बताया कि हाल ही में एक प्रमुख समाचार पत्र की ओर से आयोजित नागरिक गोष्ठी में एक सेवानिवृत्त डीएसपी (Retired DSP) ने भी इस बात का खुलासा किया था. शहर में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए इस प्रस्ताव को तुरंत धरातल पर उतारने की जरूरत है.
शांति समितियों का हो पुलिस वेरिफिकेशन, नेताओं की तरह लिया जाए एफिडेविट
थाना स्तर पर काम करने वाली शांति समितियों पर बड़ा सवाल उठाते हुए जवाहरलाल शर्मा ने मांग की है कि वर्तमान की सभी शांति समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाए. उन्होंने निम्नलिखित सुझाव दिए—
—समितियों में केवल नए, योग्य और साफ-छवि वाले लोगों को ही शामिल किया जाए.
–शामिल होने वाले हर सदस्य का कड़ाई से पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए.
-सदस्यों से एमपी, एमएलए या मेयर चुनाव की तर्ज पर एफिडेविट (शपथ पत्र) लिया जाए.
”चूंकि शांति समितियां सालभर सक्रिय नहीं रहती हैं और कई बार इनमें अवांछित व असामाजिक तत्व भी शामिल हो जाते हैं, इस वजह से ये समितियां अपना असली फर्ज नहीं निभा पातीं, जबकि शहर की शांति व्यवस्था और पुलिस-जनता के बीच समन्वय के लिए इनका सही होना बेहद जरूरी है.”
— जवाहरलाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
लाउडस्पीकर के जरिए बस्तियों तक पहुंचे पुलिस का संदेश
इसके अलावा उन्होंने एक और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि जमशेदपुर की बस्तियों में रहने वाले लाखों लोग न तो नियमित अखबार पढ़ पाते हैं और न ही सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय हैं, ऐसे में पुलिस की बात और जरूरी सूचनाएं उन तक नहीं पहुंच पातीं. इसके समाधान के लिए पुलिस की पीसीआर या गश्ती जीप में लाउडस्पीकर लगाए जाएं. पुलिस द्वारा जनता से सहयोग की अपील से जुड़ा एक ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड करके शहर की गली-गली में तीन-चार दिनों तक बजाया जाए, ताकि अंतिम व्यक्ति तक पुलिस का संदेश पहुंच सके.
जवाहरलाल शर्मा का मानना है कि अगर पुलिस प्रशासन इन बुनियादी और कड़े सुझावों पर अमल करता है, तो जमशेदपुर की कानून-व्यवस्था की स्थिति में निश्चित तौर पर एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.


