
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित भोजपुरी भवन में सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद द्वारा एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन भोजपुरी भाषा के अनमोल लोक कलाकार और महान नाटककार स्वर्गीय भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष व वरीय साहित्यकार अरबिंद बिद्रोही ने की। इस दौरान उपस्थित सभी साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों ने भिखारी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: भिखारी ठाकुर का अतुलनीय योगदान
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सम्पूर्ण भोजपुरी विकास मंच के महामंत्री प्रदीप सिंह भोजपुरिया ने भिखारी ठाकुर के जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर साक्षात माँ सरस्वती के वरद पुत्र थे। यद्यपि वे स्कूली शिक्षा अधिक प्राप्त नहीं कर सके, लेकिन उनकी लेखनी और कंठ में अद्भुत कला का वास था।
भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों और कला के माध्यम से तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों और बुराइयों के खिलाफ एक सफल जन-जागरण अभियान चलाया। उन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज सुधार का जो बीड़ा उठाया, वह आज भी प्रासंगिक है।
भोजपुरी नाटकों की समृद्ध विरासत
भिखारी ठाकुर को उनकी अद्वितीय रचना शैली के कारण ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ (Shakespeare of Bhojpuri) भी कहा जाता है। उन्होंने लोक रंगमंच को एक नई दिशा दी। उनके द्वारा रचित प्रमुख नाटकों में बिदेसिया, गबरघिचोर, गंगास्नान, बेटी बियोग, भाई बिरोध, बिधवा-बिलाप, कलियुग प्रेम, ननद भौजाई और नकल भाड़ आ नेटुआ शामिल हैं। इन नाटकों ने न केवल ग्रामीण जीवन की सच्चाई को मंच पर उतारा, बल्कि सामाजिक विसंगतियों पर भी गहरी चोट की।
READ MORE :JAMSHEDPUR NEWS :जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में गैर-शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन की मांग: ‘कॉलेज नहीं, विश्वविद्यालय की तरह चले व्यवस्था’
साहित्यकारों ने कृतियों को किया याद
कार्यक्रम के दौरान सचिव उदय प्रताप हयात ने भिखारी ठाकुर की महान कृतियों और भोजपुरी साहित्य में उनके योगदान को विस्तार से याद किया। वहीं, यमुना तिवारी हर्षित ने उनके जीवन दर्शन, संघर्षों और एक साधारण व्यक्ति से ‘भोजपुरी के शेक्सपियर’ बनने तक के सफर पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर भिखारी ठाकुर को श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में अरबिंद बिद्रोही, प्रदीप सिंह भोजपुरिया, उदय प्रताप हयात, यमुना तिवारी हर्षित, मिथिलेश तिवारी और अतुल प्रसाद सहित कई अन्य प्रमुख भोजपुरी भाषी और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।


