जमशेदपुर।
टाटानगर रेलवे स्टेशन स्थित इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में रेल कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में रेल सिविल डिफेंस द्वारा लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को एंबुलेंस सेवा तथा बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) का प्रशिक्षण दिया गया।
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गोल्डन आवर का महत्व
प्रशिक्षण की शुरुआत करते हुए सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया कि किसी भी दुर्घटना के बाद “गोल्डन आवर” के दौरान की गई त्वरित कार्रवाई जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने आपात स्थिति में सही निर्णय लेने और तुरंत सहायता पहुंचाने पर जोर दिया।
एंबुलेंस सेवाओं की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को 102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि 102 नंबर एंबुलेंस मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की आपात स्थिति के लिए होती है, जबकि 108 एंबुलेंस गंभीर दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियों के लिए उपयोग की जाती है।
बेसिक और एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट
108 एंबुलेंस में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) के उपकरण उपलब्ध होते हैं, जबकि 102 एंबुलेंस में बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की सुविधाएं होती हैं। इस अंतर को समझकर सही समय पर सही एंबुलेंस सेवा का चयन करना बेहद जरूरी बताया गया।
इमरजेंसी तकनीक और रेस्क्यू प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान स्ट्रेचर की अनुपलब्धता की स्थिति में मैन-मेड स्ट्रेचर बनाने और मरीज को सुरक्षित तरीके से एंबुलेंस तक पहुंचाने की विधि भी सिखाई गई। साथ ही अनिल कुमार सिंह और कल्याण कुमार साहू ने आग बुझाने के तरीकों, फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग और एलपीजी गैस लीक से उत्पन्न आग पर नियंत्रण के उपायों का डेमो दिया।
बड़ी संख्या में रेलकर्मी शामिल
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, रांची, आद्रा और खड़गपुर मंडल के लगभग 200 लोको पायलट और सहायक लोको पायलट उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण संस्थान की पहल
प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य शुभेंदु हलधर ने सिविल डिफेंस के इस प्रयास की सराहना की और महीने में चार दिन सेफ्टी प्रशिक्षण आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि रेल कर्मियों को नियमित रूप से आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा सके।
सुरक्षा जागरूकता पर जोर
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रेल कर्मियों को आपात स्थितियों में त्वरित और सही निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा को और मजबूत किया जा सके।




