जमशेदपुर/पोटका: झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और उसकी जड़ों से जुड़े पारंपरिक खेल अब केवल गांवों की गलियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्हें एक नया और भव्य मंच मिल रहा है। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत तेंतला फुटबॉल मैदान में आयोजित दो दिवसीय ‘काती’ प्रीमियर लीग-2026 ने यह साबित कर दिया कि यदि सही संरक्षण मिले, तो पारंपरिक खेल भी आधुनिक खेलों की तरह रोमांच और उत्साह पैदा कर सकते हैं।
टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) की ओर से आयोजित इस भव्य प्रतियोगिता का समापन शुक्रवार को हुआ, जिसने न केवल विलुप्त हो रही खेल संस्कृति को पुनर्जीवित किया, बल्कि आदिवासी युवाओं के भीतर अपनी विरासत के प्रति गर्व का भाव भी जगाया।
45 टीमों का महासंग्राम: झारखंड से ओडिशा तक का संगम
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण झारखंड और ओडिशा के विभिन्न जिलों से पहुंचीं टीमें रहीं। सीनियर और जूनियर वर्ग में कुल 45 टीमों ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मैदान में खिलाड़ियों के जोश और दर्शकों के उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘काती’ आज भी आदिवासी समाज के रग-रग में बसा है। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मिलन का केंद्र बन गया।
क्या है ‘काती’ खेल? परंपरा और रोमांच का अनूठा मिश्रण
काती खेल मुख्य रूप से भूमिज और संथाल आदिवासी समुदायों की पहचान है। यह पारंपरिक रूप से फसल की कटाई के बाद खुशी और भाईचारे के प्रतीक के रूप में खेला जाता है।
सामग्री: इस खेल में बांस की एक लंबी लाठी और इमली की लकड़ी से बनी अर्धवृत्ताकार डिस्क, जिसे ‘काती’ कहा जाता है, का प्रयोग होता है।
खेल का नियम: एक टीम अपनी कातियों को जमीन पर सीधा खड़ा करती है, जबकि दूसरी टीम के खिलाड़ी एक निश्चित दूरी से अपनी लाठी की सहायता से उन पर निशाना साधते हैं।
विजेता का निर्धारण: हर सफल प्रहार पर अंक दिए जाते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण निशाना ‘बर्गा’ (जिसे राजा कहा जाता है) पर लगाना होता है। जो टीम अंत में बर्गा को गिराने में सफल होती है, उसे ही विजेता घोषित किया जाता है।
विधायक संजीव सरदार का संदेश और दिशा
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पोटका विधायक संजीव सरदार ने विजेताओं को पुरस्कृत कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे पारंपरिक खेल हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक खेलों के साथ-साथ अपनी परंपराओं से जुड़े खेलों को भी अपनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी विरासत सुरक्षित रह सके।
प्रतियोगिता के विजेता और आयोजन में योगदान
प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में गुरता (बी) प्रथम, एसएसएमसी कोपे द्वितीय, बालीबेड़ा तृतीय एवं खेरबाड़वीर चतुर्थ स्थान पर रहे। वहीं जूनियर वर्ग में हांसदा स्टॉर मेजोगोड़ा ने प्रथम, जेजेयुसी रादुड़ ने द्वितीय, जियाड़ जामाता ने तृतीय तथा आरएमएमसी पोड़ाहातु ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।इस सफल आयोजन में टाटा स्टील फाउंडेशन के ट्राइबल आइडेंटिटी लीड शिव शंकर कांडेयोंग, मैनेजर आनंद बोयपाई, बीरेन तियु, आरसी टुडू, लखन हांसदा, रीतेश टुडू, देवराज मुंडा, शिव नारायण हेंब्रोम, अजिंक्या बिरुआ, सालखन मुर्मू, रमेश सुंडी सहित अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा।




