जमशेदपुर।
लौहनगरी जमशेदपुर में एक बार फिर भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। शहर की प्रतिष्ठित सामाजिक एवं धार्मिक संस्था ‘नारायणी सेवा ट्रस्ट’ के तत्वावधान में तीन दिवसीय संगीतमय धार्मिक कथा ‘नानी बाई रो मायरो’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य भक्तों को सीधे भगवान की भक्ति से जोड़ना है।
31 मार्च से साकची में होगा भव्य आयोजन आयोजन समिति के अनुसार, यह धार्मिक कार्यक्रम 31 मार्च से 2 अप्रैल (मंगलवार से गुरुवार) तक चलेगा। कथा का आयोजन साकची स्थित चंदूलाल अशोक कुमार भालोटिया सभागार, बोधि मंदिर मैदान (राजेंद्र विद्यालय के ठीक बगल में) में किया गया है। तीनों दिन विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की जाएगी और पूरे विधि-विधान के साथ कार्यक्रम का संचालन होगा।
जया किशोरी जी की सुमधुर वाणी से होगा कथा वाचन इस तीन दिवसीय महाआयोजन में देश की जानी-मानी और विश्वविख्यात आध्यात्मिक प्रवक्ता पूज्या सुश्री जया किशोरी जी अपने श्रीमुख से भक्तों को ‘नानी बाई रो मायरो’ की कथा सुनाएंगी। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जानकारी के अनुसार, जया किशोरी जी अपनी 25 सदस्यीय टीम के साथ जमशेदपुर शहर पहुंच चुकी हैं और शहरवासियों में उन्हें सुनने को लेकर भारी उत्साह का माहौल है।
बिना पास के नहीं मिलेगी एंट्री, बने हैं 3 प्रवेश द्वार नारायणी सेवा ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों—राजकुमार चंदूका, राजकुमार संघी, कैलाश सरायवाला, विजय मित्तल और अनिल नरेडी—ने व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विशाल पंडाल में लगभग 3,000 श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम व्यवस्था की गई है। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए कथा स्थल पर प्रवेश के लिए तीन अलग-अलग गेट बनाए गए हैं।
आयोजकों ने स्पष्ट रूप से अपील की है कि पंडाल में प्रवेश केवल ‘प्रवेश पास’ (Entry Pass) के माध्यम से ही दिया जाएगा। जिनके पास पास उपलब्ध नहीं है, उनसे आग्रह किया गया है कि वे बिना वजह कथा स्थल के बाहर भीड़ न लगाएं।
101 सहयोगी परिवारों का मिल रहा है योगदान पंडाल के भीतर श्रद्धालुओं को सुगमता से और व्यवस्थित रूप से बैठाने की पूरी जिम्मेदारी पुरुष स्वयंसेवकों के साथ-साथ महिला सदस्यों को भी सौंपी गई है। यह पूरा भव्य आयोजन नारायणी सेवा ट्रस्ट से जुड़े 101 सहयोगी परिवारों के सक्रिय और समर्पित योगदान से संपन्न हो रहा है। शहर के श्रद्धालु इस आध्यात्मिक गंगा में गोता लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।



