जमशेदपुर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय प्रशासन और झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के बीच सोमवार को प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी। कुलपति की ओर से ई-मेल के माध्यम से सहमति मिलने के बाद भी निर्धारित समय पर वार्ता नहीं होने और महासंघ के प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश से रोकने के प्रयास का आरोप लगाया गया है। इस घटनाक्रम पर महासंघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी और क्षोभ व्यक्त किया है।
महासंघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, कुलपति प्रो. एला कुमार ने 30 अक्टूबर 2026 को ई-मेल के माध्यम से वार्ता की सहमति दी थी। इसके तहत 2 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजे विश्वविद्यालय के सिदगोड़ा परिसर में बैठक निर्धारित थी। महासंघ के प्रतिनिधि तय समय पर परिसर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि न तो कुलपति वार्ता के लिए उपस्थित हुईं और न ही बैठक स्थगित होने की कोई पूर्व सूचना दी गई।
मुख्य द्वार पर प्रतिनिधियों को रोकने का आरोप
महासंघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर सुरक्षा पर्यवेक्षक निरंजन पांडेय ने प्रतिनिधियों को प्रवेश करने से रोकने का प्रयास किया। उन्होंने इसके लिए कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर के आदेश का हवाला दिया। महासंघ ने सवाल उठाया कि जब कुलपति ने स्वयं ई-मेल के माध्यम से वार्ता की सहमति दी थी और उसकी प्रतिलिपि कुलसचिव को भी भेजी गई थी, तो फिर प्रतिनिधियों को प्रवेश से रोकने का निर्देश किस आधार पर दिया गया?
महासंघ के अनुसार, परिसर में मौजूद प्रॉक्टर डॉ. सुधीर कुमार साहू से भी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्होंने संवाद करने से इनकार कर दिया। वहीं, कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर से संपर्क करने पर उन्होंने इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया। महासंघ का कहना है कि फोन के माध्यम से भी उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
वार्ता के एजेंडे में थे कर्मचारियों से जुड़े तीन अहम मुद्दे
महासंघ ने कुलपति के साथ प्रस्तावित बैठक के लिए केवल तीन विषय निर्धारित किए थे।
1. दो कर्मचारियों के स्थानांतरण का मामला: श्री रंजीत कुमार राय और जय किशोर प्रसाद की ओर से सामूहिक रूप से समस्याओं के निराकरण के लिए पत्र दिए जाने के बाद उनके स्थानांतरण पर महासंघ ने सवाल उठाए हैं। संगठन ने इसे प्रथम दृष्टया प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए न्यायोचित समाधान की मांग की थी।
2. मैन-मंथ रेट का अनुपालन: झारखंड सरकार के वित्त विभाग की ओर से फरवरी 2026 में जारी मैन-मंथ रेट संबंधी आदेश को विश्वविद्यालय में लागू करने और संबंधित कर्मचारियों को इसका लाभ देने पर चर्चा होनी थी।
3. आउटसोर्सिंग कर्मियों की छुट्टी और अधिकार: झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल, 2025 के प्रावधानों के तहत छह दिवसीय कार्य सप्ताह वाले विभागों में आउटसोर्सिंग कर्मियों को 18 दिनों के अवकाश की सुविधा देने तथा अन्य वैधानिक एवं प्रक्रियात्मक प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा शामिल था।
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नई तिथि निर्धारित करने की मांग
महासंघ ने कहा कि इन तीनों मुद्दों का संबंध कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों, कार्य परिस्थितियों और न्यायोचित मांगों से है। संगठन ने जानबूझकर वार्ता का एजेंडा सीमित रखा था, ताकि विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सकारात्मक बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।
महासंघ ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करने तथा तीनों मुद्दों पर बातचीत के लिए शीघ्र नई तिथि निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में महासंघ के अधिकृत प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करने की अपील की है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के नैसर्गिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा उसकी जिम्मेदारी है। प्रशासनिक दबाव या संवादहीनता से महासंघ पीछे नहीं हटेगा और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को उचित प्रशासनिक एवं वैधानिक मंचों पर उठाता रहेगा।

