
जमशेदपुर: झारखंड की औद्योगिक नगरी और कोल्हान क्षेत्र में विस्थापितों और स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। तूरामडीह विस्थापित समिति, जमशेदपुर का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाजपा नेता और आदिवासी सुरक्षा परिषद के जिला अध्यक्ष राम सिंह मुंडा के नेतृत्व में गुरुवार को यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) राकेश कुमार से जादूगोड़ा स्थित गेस्ट हाउस में मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विस्थापितों और स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों की ज्वलंत समस्याओं को सीएमडी के समक्ष मजबूती से रखा और शीघ्र निराकरण के लिए 17 सूत्री मांगपत्र सौंपा। यह मुलाकात क्षेत्र के विकास और विस्थापितों के न्याय के दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

रोजगार में प्राथमिकता और लंबित बहाली शुरू करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने यूसीआईएल प्रबंधन के सामने रोजगार और आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मांगपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय विस्थापित और प्रभावित परिवारों के युवाओं को कंपनी के विभिन्न कार्यों में रोजगार में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे कार्यरत दैनिक या अनुबंध मजदूरों को कार्य से किसी भी हाल में न हटाने, और लंबे समय से लंबित पड़े विस्थापितों की बहाली प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने की जोरदार मांग की गई। समिति का स्पष्ट मानना है कि स्थानीय संसाधनों पर पहला अधिकार विस्थापित परिवारों का है।
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मलेरिया प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप और बुनियादी सुविधाएं
स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र में फैल रहे ब्रेन मलेरिया के प्रकोप को रोकने के लिए प्रभावित गांवों में तत्काल विशेष मेडिकल कैंप लगाने की मांग की। इसके अलावा, विस्थापित परिवारों के उचित पुनर्वास, स्थानीय मार्केट कॉम्प्लेक्स में दुकानों के न्यायसंगत आवंटन, क्षेत्र में सड़क, बिजली और स्वच्छ पेयजल की सुदृढ़ व्यवस्था करने तथा स्थानीय छात्रों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग सेंटर शुरू करने जैसी जनोपयोगी मांगें भी रखी गईं।
प्रदूषण पर रोक, मुआवजा और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर
खनन और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले नुकसान तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने कई अहम मुद्दे उठाए:
मुआवजा: खदानों में होने वाली भारी ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों के जिन मकानों को क्षति पहुंची है, उनके मालिकों को उचित मुआवजा शीघ्र दिया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण: मिल और खदान क्षेत्र से निकलने वाले धूल और प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सांस्कृतिक सम्मान: आदिवासी भाषा-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ हो (Ho) समाज के महान व्यक्तित्व और लिपि के जनक गुरु लाको बोदरा की प्रतिमा स्थापित की जाए तथा क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया जाए।
CMD ने दिया सकारात्मक कार्रवाई और मेडिकल टीम भेजने का भरोसा
विस्थापित समिति की बातों को सुनने के बाद यूसीआईएल के सीएमडी राकेश कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रबंधन स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मेडिकल टीम भेजने का भरोसा दिया। इसके साथ ही, कार्यरत मजदूरों को हटाने के मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी मजदूर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने मांगपत्र में शामिल अन्य सभी मांगों पर भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए चरणबद्ध तरीके से पहल करने का आश्वासन दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में राम सिंह मुंडा के साथ मुख्य रूप से गणेश सरदार, रामराई सोरेन, प्रकाश सांडील, मंगल कराई, प्रिया कुंकल, बबलू करूआ, विवेक मंडा सहित तूरामडीह के कई विस्थापित परिवार के सदस्य उपस्थित थे।



