
जमशेदपुर।

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने तीन जूलाई को हुए शहर में हुए सफल और स्वतःस्फूर्त बंद के लिए आम जनता, एनडीए (NDA) के घटकों और सर्वसमाज के नागरिकों को बधाई दी है। विधायक ने इसे केवल एक सामान्य विरोध प्रदर्शन न मानकर, भविष्य की राजनीति और समाज के लिए एक बड़ा और स्पष्ट संदेश करार दिया है। उन्होंने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि शहर के नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर जिस तरह से एकजुटता दिखाई है, वह यह साबित करता है कि जनता अब बढ़ते अपराध और प्रशासनिक उदासीनता से पूरी तरह तंग आ चुकी है और एक सुरक्षित माहौल चाहती है।
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अपराध, भ्रष्टाचार और महँगाई से त्रस्त है आम जनता
सरयू राय ने शहर की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जमशेदपुर की आम जनता केवल अपराध, छिनतई, चोरी और चापड़बाजी जैसी हिंसक घटनाओं से ही परेशान नहीं है, बल्कि वह भ्रष्टाचार, बढ़ती महँगाई और लफंगई की राजनीति से भी त्रस्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब व्यवस्था आम नागरिकों को सुरक्षा और राहत देने में विफल होने लगती है, तो जनता स्वतःस्फूर्त तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आगे आती है। कल का बंद शहर के आम लोगों के इसी आक्रोश और बदलाव की मजबूत इच्छा का सीधा और स्पष्ट परिणाम था।
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एनडीए और जदयू कार्यकर्ताओं से अपील: समझें बंदी का संदेश
अपने वक्तव्य में विधायक ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), और विशेष रूप से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के साथियों व कार्यकर्ताओं से एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को इस स्वतःस्फूर्त बंद के गहरे संदेश को ग्रहण करना चाहिए और इसी आधार पर भविष्य की एक स्वस्थ और जनसरोकार वाली राजनीति का खाका तैयार करना चाहिए। वर्तमान समय में सभी राजनीतिक कर्मियों का यह मुख्य दायित्व है कि वे अपने निजी व निहित स्वार्थों और गंदी प्रतिस्पर्धा की राजनीति से ऊपर उठें। जब राजनीति सिद्धांतपरक राह पर चलेगी, तभी जनता उसका सही मूल्यांकन करेगी और समय आने पर उसका हिसाब रखेगी।
वैचारिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता
भारतीय राजनीति के गिरते स्तर पर बात करते हुए सरयू राय ने देश के महान विचारकों को याद किया। उन्होंने कहा कि हमारे पास महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसी महान वैचारिक धरोहर मौजूद हैं। इन्हीं के आदर्शों के आधार पर स्वतंत्र भारत की राष्ट्रीय राजनीतिक धाराओं को आगे बढ़ना था, लेकिन दुर्भाग्यवश विगत कुछ दशकों में ये मूल्य और धाराएँ हमारे राजनीतिक जनमानस से पूरी तरह गुम हो गई हैं। कल की सफल बंदी ने इन मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक नया अवसर और गंभीर संदेश दिया है, जिसका अनुसरण सभी को करना चाहिए।
‘नैतिक राजनीति बनाम राजनैतिक रणनीति’ को समझने पर जोर
विधायक ने अपने बयान के अंत में राजनीतिक कार्यशैली और संगठन निर्माण में बदलाव पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में “नैतिक राजनीति बनाम राजनैतिक रणनीति” की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी हो गया है। नेताओं को खुद भी इस अंतर को समझना होगा और अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को भी इसके प्रति जागरूक करना होगा। जनता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है; अब राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं को इस जनभावना का सम्मान करते हुए नए समर्थक और सिद्धांतवादी कार्यकर्ता तैयार करने होंगे, ताकि समाज में एक सकारात्मक, पारदर्शी और सुरक्षित माहौल का निर्माण हो सके।


