
जमशेदपुर।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 (World Environment Day) के अवसर पर टाटा स्टील ने एक टिकाऊ और हरित भविष्य की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने 2045 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero by 2045) का लक्ष्य रखा है। टाटा स्टील ने डिकार्बोनाइजेशन का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत 2030 तक भारत में उत्सर्जन तीव्रता में 10-15%, नीदरलैंड में 43% CO₂ और यूके में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) तकनीक के जरिए 90% तक कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लुधियाना में 100% स्क्रैप-आधारित EAF से लो-कार्बन मैन्युफैक्चरिंग
टाटा स्टील ने भारत में कम कार्बन वाले स्टील उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल की है। लुधियाना में कंपनी के पहले इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) का सफलतापूर्वक उद्घाटन किया गया है, जो पूरी तरह से 100% स्क्रैप पर आधारित है।
यह प्लांट लगभग 50% नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से संचालित हो रहा है।
इससे प्रति टन स्टील पर 0.3 टन से भी कम CO₂ का उत्सर्जन होता है, जो पारंपरिक स्टील उद्योग के लिए एक नया ग्लोबल बेंचमार्क है।
यूके और नीदरलैंड में ग्रीन स्टील की ओर ऐतिहासिक कदम
वैश्विक स्तर पर भी टाटा स्टील बड़े और संरचनात्मक बदलाव कर रही है। यूके के पोर्ट टैलबोट (Port Talbot) में EAF प्रोजेक्ट के लिए £1.25 बिलियन का निवेश किया गया है, जिसमें यूके सरकार का £500 मिलियन का अनुदान भी शामिल है। इससे अगले एक दशक में 50 मिलियन टन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। वहीं, टाटा स्टील नीदरलैंड ‘ग्रीन स्टील प्लान’ के तहत डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और EAF तकनीक की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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जमशेदपुर में ‘HIsarna’ तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
डिकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में नवाचार करते हुए टाटा स्टील जल्द ही जमशेदपुर में 1 MTPA क्षमता की ‘HIsarna’ (हिसामा) तकनीक का प्रदर्शन करेगी। इससे कोकिंग जैसी ऊर्जा-गहन प्रक्रियाओं को खत्म किया जा सकेगा और कम ग्रेड के कच्चे माल का उपयोग संभव होगा।
कंपनी ने टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के साथ 379 मेगावाट (MW) की स्वच्छ ऊर्जा के लिए समझौता किया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक कंपनी के संचालन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4% हो गई है।
लगातार नौवें वर्ष ‘वर्ल्डस्टील सस्टेनेबिलिटी चैंपियन’ की मान्यता टाटा स्टील के जिम्मेदार नेतृत्व को दर्शाती है। कंपनी यह साबित कर रही है कि संसाधन-गहन उद्योग भी अत्याधुनिक नवाचारों के जरिए एक हरित कल का निर्माण कर सकते हैं।


