
जमशेदपुऱ।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (MoE) के दिशा-निर्देशों के आलोक में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। संस्थान के निदेशक गौतम सूत्रधार के नेतृत्व में चल रहे इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र मार्गदर्शन (Student Mentoring), मनोसामाजिक कल्याण (Psychosocial Well-being), परामर्श सहायता प्रणाली (Counselling Support) और परिणाम-आधारित शिक्षण (Outcome-Oriented Pedagogy) को मजबूत करना है। 26 मई को हुए भव्य उद्घाटन के बाद, कार्यक्रम का दूसरा सत्र डीजेएलएचसी कक्ष संख्या-212 में आयोजित किया गया, जिसमें छात्र कल्याण से जुड़े कई गंभीर विषयों पर चर्चा हुई।
छात्रों की ‘अदृश्य बाधाओं’ को पहचानें शिक्षक: सीआईपी रांची
कार्यक्रम के पहले तकनीकी सत्र में “छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली दृश्य एवं अदृश्य बाधाओं की पहचान” विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। बतौर मुख्य वक्ता सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) रांची के साइकियाट्रिक सोशल वर्क ट्यूटर विष्णु सुरेश ने संकाय सदस्यों (Faculty) को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कई बार छात्र मानसिक, व्यवहारिक, भावनात्मक या सामाजिक-पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रहे होते हैं, जो उनकी पढ़ाई पर सीधा असर डालती हैं। शिक्षकों को इन अदृश्य बाधाओं की प्रारंभिक पहचान करनी होगी। उन्होंने फैकल्टी मेंटर्स को एक मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण मनोसामाजिक हस्तक्षेप रणनीतियां सुझाईं।
आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) से बदलेगा क्लासरूम का माहौल
दूसरे सत्र में कोलकाता की साइकियाट्रिक प्रोफेशनल एन. टी. रूपा ने “आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) एवं सक्रिय शिक्षण पद्धति” पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अब शिक्षा को शिक्षक-केंद्रित के बजाय ‘शिक्षार्थी-केंद्रित’ (Learner-Centric) बनाना होगा। सत्र के दौरान:
पाठ्यक्रम परिणामों का रचनात्मक संरेखण (Constructive Alignment)
दक्षता मानचित्रण (Competency Mapping)
सहयोगात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम मॉडल (Experiential Learning)
जैसे आधुनिक विषयों पर बारीकी से प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और समस्या-समाधान क्षमता का तेजी से विकास होता है।
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एनआईटी के शीर्ष अधिकारी और संकाय सदस्य रहे उपस्थित
यह पूरा कार्यक्रम छात्र कल्याण अधिष्ठाता व प्रभारी कुलसचिव सरोज कुमार सारंगी, और संकाय कल्याण अधिष्ठाता दिलीप कुमार यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का सफल संयोजन कुमारी नम्रता एवं एस. सक्थिवेल द्वारा किया गया। वहीं समन्वय टीम में विजय कुमार डल्ला, कुणाल सिंह, संगीता कुमारी एवं पौलामी माजी शामिल रहे, जबकि अजिताभ गौतम एवं पुष्पा बाला महतो ने सह-समन्वयक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इस ज्ञानवर्धक सत्र में उप-निदेशक आर. वी. शर्मा सहित सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष और विभिन्न विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे।



