जमशेदपुर: टाटा स्टील की खेल प्रोत्साहन पहल से झारखंड समेत देश के कई युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। तीरंदाजी से लेकर स्पोर्ट क्लाइंबिंग तक, प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाओं और खेल विज्ञान की मदद से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया जा रहा है। कंपनी की खेल अकादमियों से निकले खिलाड़ियों ने ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर अपनी पहचान बनाई है।
READ MORE :Indian Railway:छठ-दिवाली पर रेलवे का तोहफा! गोंदिया-पटना स्पेशल ट्रेन 6 नवंबर से, रांची-बोकारो-धनबाद समेत इन स्टेशनों पर ठहराव
टाटा आर्चरी अकादमी ने तैयार किए नौ ओलंपियन
जमशेदपुर के जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वर्ष 1996 में स्थापित टाटा आर्चरी अकादमी देश में तीरंदाजी प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। अकादमी के माध्यम से अब तक नौ ओलंपियन, नौ अर्जुन पुरस्कार विजेता और 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज तैयार किए जाने का दावा किया गया है।
अकादमी के खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में भी लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्ष 2006 में दोहा एशियाई खेलों में जयंत तालुकदार के कांस्य पदक से शुरू हुआ यह सफर 2010 के ग्वांगझू और 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों तक जारी रहा। वर्ष 2026 में अंकिता भकत ने आइची-नागोया में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला रिकर्व टीम का हिस्सा बनकर इस उपलब्धि को आगे बढ़ाया।
स्पोर्ट क्लाइंबिंग में भी युवाओं को मिल रहा मौका
टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) के माध्यम से स्पोर्ट क्लाइंबिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2015 से अब तक 16 जमीनी स्तर के केंद्रों के नेटवर्क के जरिए करीब 1,000 युवाओं को इस खेल से जोड़ा गया है।
इस पहल का परिणाम 2026 के एशियाई खेलों में देखने को मिला, जहां जोगा पूर्ति और दीपु मल्लेश ने स्पीड क्लाइंबिंग के फाइनल राउंड में जगह बनाई। दोनों खिलाड़ियों ने क्रमशः 7.28 सेकंड और 5.09 सेकंड का समय दर्ज कर नए भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
खिलाड़ियों की तैयारी को मजबूत करने के लिए थाईलैंड के स्पीड कोच और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया गया। जोगा पूर्ति की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे एक साधारण आदिवासी परिवार से आते हैं। उनकी सफलता इस बात को रेखांकित करती है कि उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
READ MORE :JAMSHEDPUR NEWS: महिला विश्वविद्यालय में कुलपति से तय वार्ता नहीं हुई, कर्मचारी महासंघ ने प्रशासन पर उठाए सवाल
प्रशिक्षण के साथ खेल विज्ञान पर भी जोर
टाटा स्टील के खेल कार्यक्रमों में खिलाड़ियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता, बल्कि उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। इसके तहत स्पोर्ट्स साइंस, पोषण, फिजियोथेरेपी, चोट से उबरने और मानसिक मजबूती जैसे पहलुओं को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।
बायोमैकेनिकल एनालिसिस, वीडियो के जरिए प्रदर्शन का आकलन और नियमित मॉनिटरिंग की मदद से खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण में बदलाव किया जाता है। जमशेदपुर में तीरंदाजी की विशेष सुविधाओं के अलावा क्योंझर में केंद्र विकसित किया जा रहा है। वहीं, जमशेदपुर और भुवनेश्वर में स्पोर्ट क्लाइंबिंग के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जमशेदपुर में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से युवाओं को अवसर
खेलों को बढ़ावा देने के लिए जमशेदपुर में एशियन किड्स और एशियन यूथ क्लाइंबिंग चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया है। इससे स्थानीय युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा और खेल संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
टाटा स्टील की इन पहलों का उद्देश्य केवल पदक विजेता खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा खेल वातावरण विकसित करना है, जहां नई प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से लेकर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण तक पहुंचने का अवसर मिले। जोगा पूर्ति और दीपु मल्लेश जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। अब इन खिलाड़ियों की नजर लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक पर भी है।


