
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम सहित झारखंड के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे हाथी-मानव संघर्ष को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा एक बड़ी पहल की जा रही है। वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक आधारित स्मार्ट कैमरा सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है। इस आधुनिक कदम की क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों ने काफी सराहना की है।

इसी क्रम में भाजपा नेता चुनु माहाली ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए वन विभाग की इस पहल का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि चाकुलिया और मानुषमुड़िया बीट के अत्यधिक संवेदनशील गांवों में इन अत्याधुनिक कैमरों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र स्थापित किया जाए।
चाकुलिया और मानुषमुड़िया के संवेदनशील गांवों में कैमरा लगाने की मांग
भाजपा नेता चुनु माहाली ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि चाकुलिया रेंज के दारिशोल बीट के अंतर्गत आने वाले लुगाहारा, दुधकुण्डी, लोधनबनी, पानीशोल एवं धोडांरी जैसे संवेदनशील गांवों को इस परियोजना में शामिल किया जाए। इसके अलावा उन्होंने मानुषमुड़िया बीट के धानघोरी, मांगड़ोशोल, सोनाकड़ा, भादुआ और बेनाशोली गांवों में भी जल्द से जल्द एआई कैमरे लगाने की मांग उठाई है। उनके अनुसार, ये सभी गांव लंबे समय से जंगली हाथियों के आतंक से बुरी तरह प्रभावित हैं और यहाँ के ग्रामीण लगातार भय और असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर हैं।
जंगली हाथियों का आतंक और जान-माल का भारी नुकसान
वर्तमान समय में जंगली हाथियों का झुंड लगातार ग्रामीण और रिहायशी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहा है, जो वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हाथियों के झुंड द्वारा रात के समय गांवों में प्रवेश कर तैयार फसलों को पूरी तरह बर्बाद करने, कच्चे-पक्के घरों को क्षतिग्रस्त करने और ग्रामीणों पर हमला करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे विपरीत समय में वन विभाग द्वारा चाकुलिया वन क्षेत्र, दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Dalma Wildlife Sanctuary) एवं सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र में शुरुआती तौर पर 26 एआई कैमरे स्थापित करने का निर्णय अत्यंत दूरदर्शी और स्वागतयोग्य है।
कैसे काम करेगी एआई (AI) तकनीक और सायरन सिस्टम?
चुनु माहाली ने एआई तकनीक की कार्यप्रणाली को समझाते हुए बताया कि ये स्मार्ट कैमरे अत्याधुनिक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हैं, जो हाथियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे (24×7) पैनी नजर रखेंगे। जैसे ही कोई हाथी या हाथियों का झुंड इन कैमरों की रेंज में आएगा, यह स्मार्ट सिस्टम बिना किसी मानवीय देरी के स्वतः ही तेज सायरन बजा देगा। सायरन बजने से स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे लोगों को समय रहते सतर्क होने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, जिससे जान-माल की क्षति को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक के इस प्रभावी उपयोग से न केवल हाथी-मानव द्वंद्व में कमी आएगी, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों को भी सुरक्षा और मानसिक राहत मिलेगी।


