
जमशेदपुर: झारखंड राज्य कृषि विपणन परिषद की ओर से कृषि उत्पादन बाजार समितियों की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने की प्रस्तावित योजना को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। इसी मुद्दे पर सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। चैंबर के उपाध्यक्ष (ट्रेड एंड कॉमर्स) अनिल मोदी ने झारखंड के कृषि मंत्री और कृषि विपणन परिषद के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर प्रस्तावित किराया वृद्धि पर रोक लगाने की मांग की है।
व्यापारियों की ओर से यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब बाजार समितियों के किराये में वृद्धि को लेकर व्यापारिक संगठनों के स्तर पर भी चर्चा चल रही है। जमशेदपुर में बाजार किराये के मुद्दे को लेकर व्यापारियों की बैठक और आगे आंदोलन की चेतावनी की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है।
4 से 9 रुपये प्रति वर्गफुट किराया करने की चर्चा
अनिल मोदी ने पत्र में कहा है कि समाचारों के अनुसार बाजार समिति की दुकानों का किराया 4 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़ाकर 9 रुपये प्रति वर्गफुट किए जाने की बात सामने आई है। उनके अनुसार, वर्तमान व्यापारिक परिस्थितियों में इतनी वृद्धि व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती है।
उन्होंने कहा कि राज्य की कई कृषि उत्पादन बाजार समितियों में व्यापारियों को अभी भी बिजली, पानी, सड़क, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सुविधाओं में अपेक्षित सुधार किए बिना किराये में वृद्धि करना उचित नहीं होगा।
पहले सुविधाएं विकसित हों, फिर किराये पर हो विचार
सिंहभूम चैंबर के उपाध्यक्ष ने कहा कि बाजार समितियों में पहले मूलभूत सुविधाओं को बेहतर और व्यवस्थित किया जाना चाहिए। इसके बाद ही दुकानों के किराये के पुनर्निर्धारण पर विचार किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि बाजार समिति परिसर में व्यापार करने वाले कारोबारियों के लिए आधारभूत सुविधाएं सीधे तौर पर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। इसलिए किराया निर्धारित करने से पहले संबंधित बाजार समितियों की सुविधाओं और व्यापारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला
अनिल मोदी ने पत्र में यह भी कहा है कि बाजार समिति के किराये में वृद्धि से संबंधित मामला झारखंड हाईकोर्ट में लंबित होने की जानकारी है। उन्होंने मांग की कि न्यायालय में मामला लंबित रहने की स्थिति में किराया वृद्धि को आगे बढ़ाने के बजाय पहले न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा की जाए।
हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक न्यायिक स्रोतों में इस विशिष्ट किराया-वृद्धि मामले की पहचान इस रिपोर्ट के आधार पर स्वतंत्र रूप से सुनिश्चित नहीं हो सकी है। इसलिए हाईकोर्ट में लंबित मामले का उल्लेख यहां अनिल मोदी द्वारा दिए गए पत्र/दावे के रूप में किया जा रहा है।
व्यापारियों और हितधारकों के साथ बैठक की मांग
अनिल मोदी ने कृषि मंत्री और कृषि विपणन परिषद के प्रबंध निदेशक से आग्रह किया कि बाजार समितियों से जुड़े किसी बड़े निर्णय से पहले व्यापारियों, बाजार समिति के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक बैठक की जाए।
उन्होंने कहा कि बैठक में व्यापारियों की समस्याओं, सुझावों और आपत्तियों को सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार और व्यापार जगत के बीच संवाद एवं समन्वय के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे बाजार समितियों का विकास भी हो और व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी न पड़े।

