जमशेदपुर।
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बड़ी सफलता हासिल की है। 8 अप्रैल 2026 की देर रात चलाए गए एक विशेष सघन जांच अभियान के दौरान RPF की तेज-तर्रार टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। इस बड़ी कार्रवाई में 75 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले गांजे के साथ चार शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसे टाटानगर स्टेशन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और अहम गांजा बरामदगी के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार से जुड़े हैं तस्करों के तार, उड़ीसा से ला रहे थे खेप
प्राप्त आधिकारिक जानकारी और RPF की प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण (बेतिया) जिले के रहने वाले हैं। इन शातिर तस्करों की पहचान अजय कुमार, रवि कुमार उर्फ बेंगा, मोहित कुमार सिंह और राजा सोनार उर्फ राज के रूप में की गई है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये सभी तस्कर उड़ीसा के विभिन्न सुदूर क्षेत्रों से सस्ते दामों पर गांजा खरीदकर टाटानगर पहुंचे थे। टाटानगर स्टेशन को इन्होंने एक सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट (Transit Point) के रूप में चुना था। यहां से इनकी योजना ट्रेन बदलकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बिहार के बेतिया तक इस नशे की खेप को पहुंचाने की थी, जहां इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाना था।
पुलिस को चकमा देने का अनोखा और शातिर तरीका
इस पूरे मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा हैरानी तस्करों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को देखकर हुई। इन तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बेहद चालाकी भरा और अनोखा तरीका अपनाया था। वे 50-50 किलो के भारी-भरकम प्लास्टिक के बोरों में तस्करी कर रहे थे। पुलिस या स्निफर डॉग्स को शक न हो, इसके लिए बोरों के बीचों-बीच गांजे के पैकेट को बड़ी ही सफाई से रखा गया था। इसके बाद गांजे के चारों तरफ और ऊपर-नीचे सोयाबीन की बड़ी (Soyabean Chunks) भर दी गई थी। ऊपरी तौर पर देखने या छूने से यह किसी आम व्यापारी का सोयाबीन का बोरा ही लगता था। लेकिन RPF की पैनी नजरों और सघन चेकिंग अभियान से वे बच नहीं सके।
कमांडर राकेश मोहन के नेतृत्व में मिली ऐतिहासिक कामयाबी
मादक पदार्थों के खिलाफ इस सफल और बड़ी कार्रवाई का नेतृत्व टाटानगर RPF पोस्ट के कमांडर राकेश मोहन ने किया। उनके सटीक खुफिया इनपुट और कुशल मार्गदर्शन में टीम के अन्य अधिकारियों और जवानों ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जैसे ही टीम को प्लेटफार्म पर संदिग्ध गतिविधि और भारी सामान के साथ कुछ युवकों के होने की भनक लगी, उन्होंने तुरंत घेराबंदी कर ली। जवानों की इसी तत्परता, मुस्तैदी और कड़ी निगरानी के चलते इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की खेप को समय रहते रोक लिया गया।
आगे की कानूनी कार्रवाई और नेटवर्क की तलाश जारी
फिलहाल, RPF ने अपनी प्रारंभिक कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद सभी चारों आरोपियों और जब्त किए गए 75 किलो गांजे को आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए रेल थाना (GRP) टाटानगर के सुपुर्द कर दिया है। जीआरपी ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पूछताछ कर रही है। अब इस बात की गहनता से जांच की जा रही है कि उड़ीसा में इन्हें गांजा सप्लाई करने वाला मुख्य सरगना कौन है और गोरखपुर तथा बेतिया में इनकी डिलीवरी किसे की जानी थी। पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा फाइनेंसरों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।




