
जमशेदपुर: मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति और नदियों-तालाबों में डूबने (Drowning) जैसी आपातकालीन घटनाओं से निपटने के लिए लौहनगरी जमशेदपुर पूरी तरह से तैयार हो रही है। इन्हीं जल आपदाओं के दौरान त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल सिविल डिफेंस टीम द्वारा जमशेदपुर के प्रसिद्ध डिमना लेक (Dimna Lake) में एक विशेष वाटरमैनशिप प्रशिक्षण (Watermanship Training) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सिविल डिफेंस के जवानों और स्वयंसेवकों को जल बचाव कार्य की आधुनिक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक तकनीकों का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे वास्तविक आपदा के समय बिना समय गंवाए लोगों की जान बचा सकें।


बाढ़, जल दुर्घटनाओं और डूबने की घटनाओं के दौरान त्वरित राहत-बचाव सुनिश्चित करने के लिए जमशेदपुर के डिमना लेक में ‘विशेष वाटरमैनशिप प्रशिक्षण’ का आयोजन।
रेल सिविल डिफेंस टीम के जवानों और स्वयंसेवकों को तैराकी, लाइफ जैकेट के उपयोग और डूबते व्यक्ति को निकालने की दी गई वैज्ञानिक ट्रेनिंग।
राष्ट्रपति सम्मानित सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया- प्रशिक्षित रेस्क्यूअर की मदद से स्वर्णरेखा और खरकई नदियों में कम की जा सकती हैं मौतें।
प्रशिक्षक मजरूल बारीक ने खाली ड्रम और प्लास्टिक बोतलों जैसे स्थानीय संसाधनों से इमरजेंसी लाइफ-सेविंग उपकरण बनाने का कराया मॉक ड्रिल (Mock Drill)।
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सीपीआर से लेकर मॉक ड्रिल तक, जवानों ने सीखीं अहम तकनीकें
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक (Life-saving) तकनीकों का गहन अभ्यास कराया गया:
रेस्क्यू ऑपरेशन: जल सुरक्षा, सुरक्षित तैराकी, लाइफ जैकेट का सही उपयोग, रस्सी के माध्यम से रेस्क्यू और नाव संचालन।
फर्स्ट एड: डूबते व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उसे तत्काल प्राथमिक उपचार (First Aid) और सीपीआर (CPR) देने की विधि।
टीम समन्वय: आपातकालीन परिस्थितियों में टीम के बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय लेने के लिए जवानों को विशेष मॉक ड्रिल (Mock Drill) भी कराई गई।
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‘खाली बोतलों और ड्रम से भी बचाई जा सकती है जान’
इस प्रशिक्षण का सबसे आकर्षक हिस्सा स्थानीय संसाधनों का उपयोग रहा। वाटरमैनशिप के कुशल प्रशिक्षक मजरूल बारीक (Mazrul Barik) एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को आपात स्थिति में काम आने वाले जुगाड़ सिखाए।
फ्लोटिंग डिवाइस: जवानों को सिखाया गया कि कैसे खाली ड्रम, प्लास्टिक की बोतल और गैलन की सहायता से अस्थायी फ्लोटिंग सुरक्षा उपकरण (Temporary Floating Devices) तैयार कर रेस्क्यू किया जा सकता है।
मैन-मेड स्ट्रेचर: इसके अलावा, घायल या अचेत व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए मौके पर उपलब्ध सामग्री से स्ट्रेचर बनाने का भी अभ्यास कराया गया।
स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के लिए प्रशिक्षित रेस्क्यूअर जरूरी
राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य एवं सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा:
“पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र, विशेषकर स्वर्णरेखा और खरकई नदियों (Subarnarekha and Kharkai Rivers) में डूबने की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित रेस्क्यूअर बहुत अहम होते हैं। स्थानीय मछुआरे जरूर मदद करते हैं, लेकिन वैज्ञानिक और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विशेष ट्रेनिंग जरूरी है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जल बचाव कार्य में सबसे पहले रेस्क्यूअर (Rescuer) को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है।
कार्यक्रम के समापन पर सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर कल्याण कुमार साहू ने प्रशिक्षक मजरूल बारीक और उनकी टीम का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अहम प्रशिक्षण में डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह, कल्याण साहू, शंकर प्रसाद सहित रेल सिविल डिफेंस टीम के पच्चीस सदस्य और स्वयंसेवक सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।





