
जमशेदपुर: अदारा ‘दबिस्तान-ए-जमशेदपुर’ के तत्वावधान में महान उर्दू शायर और उस्ताद मिर्ज़ा दाग़ देहलवी की जयंती पर एक गरिमामयी शेरी निशस्त (काव्य गोष्ठी) का आयोजन किया गया। सोमवार की शाम जवाहर नगर स्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित इस महफिल में शहर के चुनिंदा रचनाकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक गौहर अज़ीज़ ने की। उस्ताद दाग़ देहलवी के उर्दू अदब में योगदान को याद करते हुए शायरों ने देर रात तक अपनी बेहतरीन ग़ज़लों से समां बांधे रखा।
उर्दू शायरी और ज़बान को दाग़ देहलवी पर नाज़ है: गौहर अज़ीज़
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शेरी निशस्त की अध्यक्षता कर रहे गौहर अज़ीज़ ने उर्दू शायरी की दुनिया में दाग़ देहलवी के मकाम और मरतबे पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उर्दू ज़बान की मिठास और शायरी की सादगी को जिस मुकाम पर दाग़ देहलवी ले गए, उस पर पूरी उर्दू दुनिया को नाज़ है। उन्होंने भावुक होते हुए आगे कहा कि आज के दौर के हम सभी शायर कहीं न कहीं उन्हीं के सिलसिले और तरज़-ए-शायरी से जुड़े हुए हैं। दाग़ की शायरी आज भी नए लिखने वालों के लिए एक बेहतरीन मदरसा (पाठशाला) की तरह है।
“तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था” से हुई शुरुआत
काव्य गोष्ठी का आगाज़ बेहद रूहानी और क्लासिकी अंदाज़ में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दाग़ देहलवी की बेहद मशहूर और मकबूल ग़ज़ल “तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था” से हुई। इस ग़ज़ल को सफीउल्लाह सफी ने अपनी सुरीली और तरन्नुम भरी आवाज़ में पेश कर पूरी महफ़िल को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस शुरुआती प्रस्तुति ने ही महफिल का मिजाज तय कर दिया और इसके बाद शेरी निशस्त का बाकायदा आगाज़ हुआ।
देर रात तक जमी महफिल, शायरों ने बटोरीं खूब दाद
शुरुआत के बाद महफिल का रंग गाढ़ा होता गया और एक के बाद एक शायरों ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लें और अशआर पेश कर उपस्थित श्रोताओं से खूब दाद और शाबाशी बटोरी। इस अदबी महफ़िल में अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करने वाले प्रमुख शायरों में शामिल थे:
गौहर अज़ीज़
वलीउल्लाह वली
सद्दाम गनी
फ़रहान ख़ान फ़रहान
सफ़ीउल्लाह सफ़ी
सकलैन मुश्ताक
शोएब अख़्तर
सफ़दर हारून
हसरत निज़ामी
सरफ़राज़ शाद
सैफ़ अली सैफ़
दशकों पुराने उस्ताद शायर की याद में सजी यह महफ़िल देर रात तक चलती रही। कार्यक्रम के अंत में फ़रहान ख़ान फ़रहान ने धन्यवाद ज्ञापन (शुक्रिया की रस्म) अदा किया, जिसके बाद इस शानदार अदबी शाम का समापन हुआ।


